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'भ्रष्ट नेताओं को पार्टी में लेने वाले भी दें इस्तीफा? PM-CM को हटाने वाले विधेयक पर केजरीवाल का पलटवार

New Delhi: आम आदमी पार्टी (एएपी) ने प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्रियों को हटाने वाले विधेयकों पर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की टिप्पणी पर सोमवार को पलटवार करते हुए कहा कि अब ये स्पष्ट है कि बीजेपी ने अरविंद केजरीवाल को दिल्ली के मुख्यमंत्री पद से हटाने की “साजिश” रची।

एएपी की यह प्रतिक्रिया शाह के कार्यालय से की गई एक सोशल मीडिया पोस्ट के बाद आई जिसमें उनके इस बयान का हवाला दिया गया था कि भ्रष्टाचार या गंभीर अपराधों के आरोपी मुख्यमंत्री या प्रधानमंत्री के लिए जेल से सरकार चलाना गलत है। एएपी प्रमुख अरविंद केजरीवाल ने शाह पर तंज कसते हुए सवाल किया कि जो नेता “भ्रष्ट” व्यक्तियों को अपने दलों में शामिल करते हैं और उन्हें पद देकर सम्मानित करते हैं, क्या उन्हें भी अपने पदों से इस्तीफा दे देना चाहिए।

केजरीवाल ने अमित शाह के कार्यालय द्वारा की गयी एक पोस्ट के जवाब में यह बात कही, जिसमें उन विवादास्पद विधेयकों पर मंत्री के बयान का हवाला था, जो प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री और मंत्रियों को जेल में 30 दिन से अधिक समय तक रहने पर पद धारण करने से रोकते हैं। अपनी टिप्पणी में शाह ने ‘एक्स’ पर कहा, ‘‘अगर कोई पांच साल से अधिक सजा वाले मामलों में जेल जाता है और उसे 30 दिन में जमानत नहीं मिलती, तो उसे पद छोड़ना पड़ेगा, कोई छिटपुट आरोप के लिए पद नहीं छोड़ना पड़ेगा। मगर जिन पर भ्रष्टाचार के आरोप है...ऐसे मंत्री, मुख्यमंत्री या प्रधानमंत्री जेल में बैठकर सरकार चलाएं, ये कितना उचित है?’’

इसके जवाब में आम आदमी पार्टी के प्रमुख ने कहा, “जो व्यक्ति गंभीर गुनाहों के मुजरिमों को अपनी पार्टी में शामिल करके उनके सारे मामले रफा-दफा करके उन्हें मंत्री, उपमुख्यमंत्री या मुख्यमंत्री बना देता है, क्या ऐसे मंत्री या प्रधानमंत्री को भी अपना पद (नहीं) छोड़ना चाहिए?” उन्होंने अपने पोस्ट में कहा, “ऐसे व्यक्ति को कितने साल की जेल होनी चाहिए? अगर किसी पर झूठा आरोप लगाकर उसे जेल में डाला जाए और बाद में वो दोषमुक्त हो जाए, तो उस पर झूठा मामला लगाने वाले मंत्री को कितने साल की जेल होनी चाहिए?”

एएपी भारतीय जनता पार्टी पर गंभीर अपराधों के आरोपी दागी नेताओं को अपनी पार्टी में शामिल करने का अक्सर आरोप लगाती रही है और भाजपा को “वाशिंग मशीन” कहकर संबोधित करती रही है। केजरीवाल की पार्टी ने यह भी आरोप लगाया है कि उन्हें और पार्टी के अन्य नेताओं को भाजपा के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार के इशारे पर केंद्रीय जांच एजेंसियों ने झूठे मामलों में गिरफ्तार किया है।

केजरीवाल को पिछले वर्ष मार्च में प्रवर्तन निदेशालय ने आबकारी नीति से जुड़े धन शोधन मामले में गिरफ्तार किया था, जिससे वह गिरफ्तार होने वाले पहले पदासीन मुख्यमंत्री बन गये थे। केजरीवाल ने एक अन्य पोस्ट में कहा, “राजनीतिक षड्यंत्र के तहत झूठे मामले में फंसाकर जब केंद्र ने मुझे जेल भेजा तो मैंने जेल से 160 दिन सरकार चलायी।” उन्होंने कहा कि पिछले सात महीनों में दिल्ली की भाजपा सरकार ने दिल्ली का ऐसा हाल कर दिया है कि आज दिल्ली वाले जेल से काम कर रही उस सरकार को याद कर रहे हैं। उन्होंने कहा, “कम से कम, जेल वाली सरकार के वक्त बिजली नहीं जाती थी, पानी आता था, अस्पतालों और मोहल्ला क्लिनिक में मुफ्त दवाइयां मिलती थीं, निशुल्क जांच होती थी, एक बारिश में दिल्ली का इतना बुरा हाल नहीं होता था, निजी स्कूलों को मनमानी और गुंडागर्दी करने की इजाजत नहीं थी।”

एएपी नेता अनुराग ढांडा ने आरोप लगाया कि भाजपा विपक्षी सरकारों को निशाना बनाकर ‘‘तानाशाही’’ लागू करना चाहती है। ढांडा ने कहा, “बीजेपी और अमित शाह ने अब साफ कर दिया है कि अरविंद केजरीवाल को दिल्ली के मुख्यमंत्री पद से हटाना भाजपा की साजिश थी। अगर उन्होंने इस्तीफा दे दिया होता, तो वे दूसरे राज्यों में भी यही कोशिश कर सकते थे। साफ है कि वे तानाशाही लाना चाहते हैं।” उन्होंने कहा, “इससे कोई फर्क नहीं पड़ता कि सरकार जेल से चलाई जा रही है या बाहर से; यह मंशा पर निर्भर करता है।”

सरकार ने संसद के मानसून सत्र के दौरान संविधान (130वां संशोधन) विधेयक, 2025 पेश किया, जिसकी राजनीतिक दलों के एक वर्ग द्वारा आलोचना की गई है और आरोप लगाया कि इससे राजनीतिक विरोधियों को निशाना बनाने का अवसर मिल जाएगा।