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अविवाहित लड़की, हाई कोर्ट ने अबॉर्शन की अनुमति नहीं दी

दिल्ली हाई कोर्ट ने एक अविवाहित युवती को अबॉर्शन की अनुमति नहीं दी है. वह 28 सप्ताह की गर्भवती है. जस्टिस सुब्रमण्यम प्रसाद ने कहा कि ये याचिका खारिज की जाती है. भ्रूण हत्या की अनुमति नहीं दी जा सकती. अपनी याचिका में युवती ने कहा था कि वह सहमति से संबंध में थी और उसे अपनी प्रेग्नेंसी के बारे में हाल ही में पता चला. युवती के वकील अमित मिश्रा ने कहा कि उसे इसके बारे में 25 जनवरी को ही पता चला कि वह 27 सप्ताह से प्रेग्नेंट है.

वकील ने कहा कि उसने प्रेग्नेंसी को समाप्त करने के लिए डॉक्टरों से सलाह ली क्योंकि वह बच्चे को जन्म देने की स्थिति में नहीं है, लेकिन उन्होंने इनकार कर दिया क्योंकि यह एमटीपी अधिनियम के तहत अनुमत 24 सप्ताह से अधिक था. वकील ने कहा कि उसके परिवार में किसी को भी उसकी प्रेग्नेंसी के बारे में नहीं पता था, चूंकि वह अविवाहित थी, इसलिए उसके मामले पर एमटीपी के लिए विचार किया जाना चाहिए.

उन्होंने अदालत से अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान यानी एम्स दिल्ली को महिला की चिकित्सकीय जांच करने का निर्देश देने का आग्रह किया ताकि यह पता लगाया जा सके कि उसकी मानसिक और शारीरिक स्थिति क्या है. हालांकि, अदालत ने प्रार्थना पर विचार करने से इनकार कर दिया.