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होर्मुज में फिर बढ़ा तनाव, अमेरिका ने ईरानी बंदरगाहों की नाकाबंदी दोबारा की शुरू, युद्ध का खतरा बढ़ा

अमेरिका और ईरान के बीच तनाव एक बार फिर बढ़ गया है। अमेरिकी सेना ने कहा है कि होर्मुज जलडमरूमध्य में व्यापारिक जहाजों पर ईरान के हमलों के जवाब में उसने ईरानी बंदरगाहों की नाकाबंदी (ब्लॉकेड) फिर से शुरू कर दी है। इससे दोनों देशों के बीच हुआ अस्थायी युद्धविराम टूटने की कगार पर पहुंच गया है और पूरे क्षेत्र में फिर से युद्ध छिड़ने की आशंका बढ़ गई है।

अमेरिका ने पहली बार अप्रैल में यह नाकाबंदी लगाई थी। बाद में जून में दोनों देशों के बीच अस्थायी समझौता होने के बाद इसे हटा लिया गया था। उस समझौते के तहत ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर 60 दिनों तक बातचीत होनी थी, लेकिन होर्मुज में बढ़ते तनाव के कारण यह बातचीत रुक गई। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने पहले होर्मुज से गुजरने वाले जहाजों पर 20% शुल्क लगाने की बात कही थी। लेकिन खाड़ी देशों के नेताओं के अनुरोध के बाद उन्होंने यह फैसला वापस ले लिया। ट्रंप ने कहा कि शुल्क लेने के बजाय अगर अरब देश अमेरिका में निवेश करें तो यह बेहतर होगा। इस फैसले के बाद ब्रेंट क्रूड ऑयल की कीमत 87 डॉलर प्रति बैरल से घटकर 78 डॉलर प्रति बैरल पर आ गई।

नाकाबंदी लागू करने से पहले अमेरिका ने ईरान के कई सैन्य ठिकानों पर हवाई हमले किए। अमेरिकी सेना के अनुसार, इन हमलों में मिसाइल, ड्रोन और तटीय रक्षा प्रणालियों को निशाना बनाया गया, ताकि ईरान की जहाजों पर हमला करने की क्षमता कमजोर हो सके। इसके जवाब में ईरान ने बहरीन, कुवैत, जॉर्डन और होर्मुज से गुजर रहे तीन तेल टैंकरों पर हमले किए। इंटरनेशनल मैरीटाइम ऑर्गनाइजेशन (IMO) के मुताबिक, यूएई से जुड़े दो टैंकरों पर हुए हमले में दो नाविकों की मौत हो गई और 14 लोग घायल हुए। इसके बाद यूएई ने भी जवाबी कार्रवाई की चेतावनी दी है।

होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों में से एक है। दुनिया का लगभग 20% कच्चा तेल और बड़ी मात्रा में प्राकृतिक गैस इसी रास्ते से गुजरती है। ईरान का कहना है कि अमेरिका उसे इस क्षेत्र में अपने अधिकार का इस्तेमाल करने से रोकना चाहता है। कतर ने ईरान के हमलों की निंदा करते हुए सभी देशों से बातचीत और कूटनीति के जरिए समाधान निकालने की अपील की है।

इस बीच, ईरानी मीडिया के मुताबिक, बुशहर, अवाज और बंदर अब्बास जैसे शहरों में भी कई धमाके हुए हैं। माना जा रहा है कि खाड़ी के कुछ देश ईरान के खिलाफ जवाबी कार्रवाई कर रहे हैं, हालांकि इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। उधर, अमेरिका और ईरान के बीच शांति वार्ता भी खतरे में पड़ गई है। पाकिस्तान की अगुवाई में एक मध्यस्थता टीम दोनों देशों के बीच फिर से युद्धविराम लागू कराने की कोशिश कर रही है। साथ ही, लेबनान और इजरायल के प्रतिनिधि भी रोम में बातचीत कर रहे हैं। लेकिन अगर अमेरिका और ईरान के बीच बड़ा युद्ध छिड़ता है, तो लेबनान-इजरायल के बीच चल रहा संघर्ष विराम भी टूट सकता है।