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राहुल गांधी के आरक्षण वाले बयान पर बवाल, जानिए कैसे 'संविधान कार्ड' ने लोकसभा चुनावों में बदले थे नतीजे?

राहुल जब से अमेरिका पहुंचे है तब से लगातार एक के बाद एक बयान वो दे रहे है जिससे भारत की सियासत में उबाल है. वहीं बीजेपी से लेकर बसपा तक लगातार सभी पार्टियां कांग्रेस को आड़े हाथों ले रही हैं. ऐसा हो भी क्यों न क्योंकि जिस आरक्षण और संवाधान की बात राहुल गांधी अमेरिका में कर रहे है उसने बीजेपी को लोकसभी चुनावों में गहरी चोट दी थी जिसके चलते बीजेपी अपने दम पर बहुमत का आंकड़ा छूने से रह गई. 

आम चुनावों में दलित सीटों पर पिछड़ी बीजेपी
राहुल के बयानों पर बीजेपी के हमलावर रुख की वजह लोकसभा चुनावों में दलित सीटों का पिछड़ना है. बता दें कि देश में दलित समाज के लिए 84 सीटें आरक्षित हैं. जहां 2019 में 54 सीटें पाने वाली एनडीए को 2024 में केवल 39 सीटें मिली. तो वहीं इंडिया गठबंधन जिसे 2019 में 11 सीटें मिली थी वे 2024 बढ़ कर 42 सीटें हो गईं और अन्य की सीटें 19 से घटकर 3 रह गईं. जिसका साफ मतलब है कि जो चुनावी नरेटिव विपक्ष की और से चुनावों में गढ़ा गया वो सफल रहा और उसका भरपूर फायद विपक्ष का मिला. सिर्फ उत्तर प्रदेश की बात की जाए तो यहां दलितों के लिए 17 सीटें रिजर्व है जिनमें से 2019 में एनडीए को 15 सीटें मिली जोकि 2024 में घटकर 8 हो गई और वही इंडिया गठबंधन को पिछली बार एक भी सीट नहीं मिली थी वो 8 सीटों पर जीती. अन्य के खाते में पिछली बार 2 सीटें आई थी जोकि इस बार घटकर 1 रह गई.

दलित वोटों के मामले में इंडिया गंठबंधन का वोट शेयर 7 फीसदी बढ़ा है जोकि अब 32 फीसदी हो गया है. जबकि एनडीए का दलित वोट शेयर 5 फीसदी घटकर इस बार 35 फीसदी रहा. यही वो मुख्य वजह रही कि आरक्षण खत्म करने का वक्त अभी नहीं बताने वाले राहुल गांधी ने जातिय जनगणना को जरूरी बताया.