क्यूबा में सोमवार को बड़ा बिजली संकट पैदा हो गया, जब देश का पूरा नेशनल इलेक्ट्रिक ग्रिड अचानक ठप हो गया। इस वजह से करीब 1 करोड़ लोग अंधेरे में डूब गए और पूरे देश में जनजीवन प्रभावित हो गया। क्यूबा के ग्रिड ऑपरेटर UNE के मुताबिक, इस बड़े ब्लैकआउट की वजह का अभी पता लगाया जा रहा है। अधिकारियों ने कहा कि किसी बड़े पावर प्लांट में खराबी नहीं आई, बल्कि ट्रांसमिशन सिस्टम में गड़बड़ी होने की आशंका है। यह हाल के दिनों में बार-बार हो रहे बिजली कटौती का ही हिस्सा है, जो कई घंटों से लेकर कई दिनों तक चलती रहती है।
सरकार ने बताया कि देश के अलग-अलग हिस्सों में छोटे-छोटे “माइक्रो सिस्टम” के जरिए बिजली बहाल करने की कोशिश शुरू कर दी गई है। यह पूरी ग्रिड को फिर से चालू करने की पहली और जरूरी प्रक्रिया मानी जाती है। इस संकट के पीछे एक बड़ी वजह अमेरिका द्वारा लगाया गया तेल प्रतिबंध भी माना जा रहा है। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने क्यूबा को मिलने वाली वेनेजुएला की तेल सप्लाई बंद कर दी और अन्य देशों को भी तेल देने पर टैरिफ की चेतावनी दी। इससे क्यूबा की पहले से कमजोर और पुरानी बिजली व्यवस्था पर और दबाव बढ़ गया।
2026 में अब तक क्यूबा को सिर्फ दो छोटे तेल जहाज ही मिले हैं: एक Mexico से, दूसरा Jamaica से। वहीं, पहले मुख्य सप्लायर रहे वेनेज़ुएला से इस साल कोई तेल नहीं आया है। देश के बड़े पोर्ट जैसे Matanzas और Moa में भी इस साल कोई बड़ा तेल आयात नहीं हुआ। क्यूबा के लोग पहले से ही बिजली कटौती के आदी हो चुके हैं।
लगातार बिजली संकट के कारण लोगों में नाराजगी बढ़ रही है। हाल ही में देश में विरोध प्रदर्शन भी हुए, जो क्यूबा जैसे कम्युनिस्ट देश में काफी दुर्लभ माने जाते हैं। इस संकट के बीच क्यूबा ने अमेरिका के साथ बातचीत शुरू की है, ताकि हालात को संभाला जा सके। वहीं ट्रंप ने कहा है कि क्यूबा आर्थिक रूप से कमजोर स्थिति में है और समझौता करना चाहता है। क्यूबा का बिजली संकट कोई नई बात नहीं है। पुराना इंफ्रास्ट्रक्चर, ईंधन की कमी, आर्थिक संकट इन सब कारणों से हालात लगातार खराब होते जा रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर जल्द समाधान नहीं निकला, तो क्यूबा को बड़े आर्थिक और सामाजिक संकट का सामना करना पड़ सकता है।