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चीन ने बनाई दुनिया की सबसे तेज चलने वाले ट्रेन, जानें कितनी है रफ्तार

चीन ने CR450 हाई-स्पीड ट्रेन का प्रोटोटाइप टेस्‍ट कर लिया है और इसकी टेस्टिंग स्‍पीड 450 किमी प्रति घंटा है. इसके साथ ही चीन ने अपना ही पुराना रिकॉर्ड तोड़ दिया है. यह नई ट्रेन चीन की सीआर400 फक्सिंग से 100 किमो प्रति घंटा ज्‍यादा तेज चलेगी. साथ ही इस नई ट्रेन में दुनिया की बेस्‍ट पैसेंजर फैसिलिटीज देने के साथ-साथ एडवांस्‍ड टेक्‍नॉलॉजी का इस्‍तेमाल किया गया है. चीन ने नेक्‍स्‍ट जेनरेशन हाई-स्पीड ट्रेन CR450 बनाकर दुनिया की सबसे तेज चलने वाली ट्रेन बनाने का तमगा भी अपने नाम कर लिया है. चीन ने 2021 में इस प्रोजेक्‍ट की शुरुआत की थी. इस प्रोजेक्‍ट का मकसद सुरक्षा, ऊर्जा दक्षता और यात्री सुविधाओं पर फोकस करते हुए तेज गति की ट्रेन बनाना था.

CR450 ट्रेन बनाने के साथ ही चीन रेलवे तकनीक में दुनिया का लीडर बनने के रास्‍ते पर है. क्‍योंकि इस ट्रेन की रफ्तार बहुत तेज है और इससे यात्रा का समय बहुत कम हो जाएगा. आप इसे ऐसे समझ सकते हैं कि कानपुर में रहने वाला व्‍यक्ति रोजाना दिल्‍ली आकर नौकरी कर सकेगा क्‍योंकि उसे करीब 500 किलोमीटर का सफर करने में एक घंटे से कुछ मिनट ही ज्‍यादा लगेंगे.

आमतौर पर दुनिया में यात्री विमान की औसत रफ़्तार 885 से 933 किलोमीटर प्रति घंटा होती है. वहीं, भारत में हवाई जहाज की रफ्तार 600 किलोमीटर प्रति घंटा होती है. जो कि चीन की नई ट्रेन से डेढ़ सौ किलोमीटर ही ज्‍यादा है. यानी कि चीन द्वारा बनाई गई दुनिया की ये सबसे तेज ट्रेन से सफर करने और भारतीय हवाई जहाज से सफर करने के समय में करीब 15 मिनट का ही फर्क रह जाएगा.

वहीं चीन की इस नई ट्रेन की तुलना यदि भारत में सबसे तेज चलने वाली वंदे भारत एक्सप्रेस से करें तो यह उससे ढाई गुना तेज है. वंदे भारत एक्सप्रेस की अधिकतम रफ्तार 180 किलोमीटर प्रति घंटा है.  हालांकि, भारतीय रेलवे के मौजूदा ट्रैक और सुरक्षा मानकों के कारण यह ट्रेन अभी अधिकतम रफ्तार से संचालित नहीं होती है.

स्‍पीड ज्‍यादा होने के बाद भी ट्रेन के अंदर यात्री बेहद आराम से बैठे रहेंगे. इसके ब्रेकिंग सिस्टम को बेहतर बनाया गया है. जिससे इतनी तेज गति पर भी स्थिरता और सुरक्षा सुनिश्चित होती है. साथ ही इसके एयरोडायनेमिक डिजाइन से ऊर्जा की खपत भी 20% से भी ज्यादा कम हो जाती है.

नए प्रोटोटाइप - CR450AF और CR450BF - में 8 कोच हैं. इनमें वाटर-कूल्ड, परमानेंट मैग्नेट ट्रैक्शन और हाई-स्टेबिलिटी बोगी सिस्टम जैसे आधुनिक सिस्टम हैं.  परमानेंट मैग्नेट ट्रैक्शन एक ऐसी तकनीक है जो ट्रेन को बिना घर्षण के चलाती है. इससे ट्रेन की गति और दक्षता बढ़ती है. बोगी सिस्टम पहियों और एक्सल को जोड़ता है. यह ट्रेन को स्थिर रखने में मदद करता है.

यात्रियों की सुविधा के लिहाज से देखें तो चीन की इस नई ट्रेन में केबिन स्‍पेस पहले की हाई-स्‍पीड ट्रेनों की तुलना में ज्‍यादा है. इसके अलावा शोर कम करने वाली तकनीकें और साइकिल और व्हीलचेयर के लिए एडजस्टेबल स्टोरेज की सुविधाएं भी शामिल हैं.  निया का सबसे बड़ा हाई-स्‍पीड रेल नेटवर्क भी चीन के पास है, जिसका वह भरपूर उपयोग कर रहा है. चीन के पास 47,000 किमी का हाई-स्‍पीड रेल परिचालन ट्रैक है. संभावना है कि चीन अगले साल से इस ट्रेन का कमर्शियल ऑपरेशन शुरू कर सकता है.