Breaking News

निठारी कांड: सुरेंद्र कोली के शव को पुलिस ने कब्जे में लिया, शुरू की आगे की जांच     |   निठारी कांड में बरी होने के बाद हरिद्वार में रहने लगा था सुरेंद्र कोली, बेचता था चाय     |   निठारी कांड में बरी हुए सुरेंद्र कोली ने की आत्महत्या, हरिद्वार में चाय की दुकान में लगाई फांसी     |   FSSAI की बच्चों के न्यूट्रिशन प्रोडक्ट्स को लेकर नेस्ले इंडिया पर कानूनी कार्रवाई     |   तेजस को मिला उड़ान का फाइनल क्लियरेंस, HAL ने दिया अप्रूवल     |  

योगी सरकार के प्रयासों से बच्चों में घटा नाटापन, चार साल में 8.2 प्रतिशत अंक की कमी

राष्ट्रीय पोषण माह के अवसर पर उत्तर प्रदेश में बच्चों के पोषण और स्वास्थ्य को लेकर सकारात्मक बदलाव सामने आया है। राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण-5 (NFHS-5) और NFHS-6 के आंकड़ों के अनुसार, प्रदेश में पांच साल से कम उम्र के बच्चों में नाटापन यानी उम्र के अनुपात में कम लंबाई की समस्या में 8.2 प्रतिशत अंक की कमी दर्ज की गई है। NFHS-5 में उत्तर प्रदेश में नाटेपन से प्रभावित बच्चों का आंकड़ा 39.7 प्रतिशत था, जो NFHS-6 में घटकर 31.5 प्रतिशत हो गया है। सरकार के अनुसार, यह सुधार बच्चों के पोषण, स्वास्थ्य सेवाओं और देखभाल को लेकर किए जा रहे प्रयासों का संकेत है।

राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन की मिशन निदेशक डॉ. पिंकी जोवेल ने कहा कि उत्तर प्रदेश जैसे बड़े और विविध आबादी वाले राज्य में नाटेपन में कमी महत्वपूर्ण है। उन्होंने बताया कि बच्चे की लंबाई में सुधार एक दिन में नहीं आता, बल्कि यह लंबे समय तक बेहतर पोषण, स्वास्थ्य सेवाओं और परिवार की देखभाल का परिणाम होता है। उन्होंने कहा कि अब चुनौती इस सुधार को और तेज करने की है, ताकि हर बच्चे को जीवन के शुरुआती वर्षों में पर्याप्त पोषण और स्वस्थ विकास का अवसर मिल सके।

vsvSvSFv

प्रोफेसर शालिनी त्रिपाठी, केजीएमयू

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर गर्भवती महिलाओं को जागरूक करने के साथ पोषण पोटली भी वितरित की जा रही है। इसके अलावा बच्चों की नियमित वृद्धि निगरानी, गर्भवती महिलाओं के पोषण, छह माह तक केवल स्तनपान, समय पर पूरक आहार और संक्रमण की रोकथाम पर जोर दिया जा रहा है।

किंग जॉर्ज चिकित्सा विश्वविद्यालय के बाल रोग विभाग की प्रोफेसर डॉ. शालिनी त्रिपाठी के अनुसार, बच्चे के जीवन के शुरुआती 1,000 दिन उसके शारीरिक और मानसिक विकास के लिए बेहद महत्वपूर्ण होते हैं। गर्भावस्था से लेकर बच्चे के दो वर्ष की उम्र तक पर्याप्त पोषण, नियमित स्वास्थ्य जांच, समय पर टीकाकरण, स्तनपान और उचित पूरक आहार पर ध्यान देने से कुपोषण को कम किया जा सकता है। उन्होंने बताया कि आंगनबाड़ी केंद्रों, स्वास्थ्य विभाग और समुदाय के स्तर पर चलाए जा रहे पोषण एवं मातृ-शिशु स्वास्थ्य कार्यक्रमों की इसमें महत्वपूर्ण भूमिका है।

सीएम योगी के निर्देश पर सक्षम आंगनबाड़ी और पोषण-2.0 की गाइडलाइन के तहत हॉट कुक्ड मील योजना संचालित की जा रही है। इसके माध्यम से 3 से 6 वर्ष तक के बच्चों को नियमित रूप से ताजा, गर्म और पौष्टिक पका हुआ भोजन उपलब्ध कराया जा रहा है। उत्तर प्रदेश में करीब 1.45 लाख को-लोकेटेड और 0.44 लाख नॉन-को-लोकेटेड आंगनबाड़ी केंद्र हैं। इन केंद्रों पर आने वाले लगभग 32.88 लाख बच्चे योजना से नियमित रूप से लाभान्वित हो रहे हैं।

प्रोफेसर डॉ. शालिनी त्रिपाठी ने बताया कि नाटापन बच्चों में लंबे समय तक रहने वाले कुपोषण का एक महत्वपूर्ण संकेतक है। यह समस्या केवल बच्चे की लंबाई तक सीमित नहीं रहती, बल्कि इसके पीछे गर्भावस्था के दौरान मां का पोषण, जन्म के समय बच्चे की स्थिति, स्तनपान, पूरक आहार और बार-बार होने वाले संक्रमण जैसे कई कारण होते हैं।

NFHS-5 के अनुसार, उत्तर प्रदेश में पांच साल से कम उम्र के बच्चों में 39.7 प्रतिशत नाटापन, 17.3 प्रतिशत दुबलापन (वेस्टिंग) और 32.1 प्रतिशत कम वजन की श्रेणी में थे। राष्ट्रीय स्तर पर भी नाटेपन के आंकड़ों में कमी दर्ज की गई है। देश में यह आंकड़ा 35.5 प्रतिशत से घटकर 29.3 प्रतिशत हुआ है, जबकि उत्तर प्रदेश में 39.7 प्रतिशत से घटकर 31.5 प्रतिशत रह गया है।