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पुरी में मनाया गया देव स्नान पूर्णिमा उत्सव, रथ यात्रा के दिन करीब

हिंदू महीने ज्येष्ठ में आने वाली 'ज्येष्ठ पूर्णिमा' को बहुत ही शुभ माना जाता है। इस दिन देश भर के जगन्नाथ मंदिरों में देव स्नान पूर्णिमा मनाई जाती है। ओडिशा के पुरी में भी इस पूर्णिमा के प्रति गहरी आस्था है। देव स्नान पूर्णिमा पर 12वीं शताब्दी के मंदिर के परिसर के 'स्वर्ण' कुएं से निकाले गए पवित्र जल के 108 घड़ों से तीनों देवताओं को स्नान करवाया जाता है। इस खास दिन भगवान जगन्नाथ, देवी सुभद्रा और भगवान बलभद्र को स्नान कराया जाता है।

माना जाता है कि पूरे दिन स्नान करवाने से देवता बीमार पड़ जाते हैं। उन्हें ठीक करने के लिए 'अनासरा घर' ले जाया जाता है, जहां वो दो हफ्ते तक ठीक होते हैं। 'अनासरा' या 'अनवसार' शब्द संस्कृत से आया है। इसका मतलब है 'दिखाई न देना'। इस एकांतवास के दौरान भगवान और उनके भाई-बहन किसी को भी दर्शन नहीं देते हैं। अनासरा घर में रहने के दौरान मंदिर के 'वैद्य' हर्बल औषधियों से देवताओं का इलाज करते हैं।

वे रथ यात्रा उत्सव से ठीक एक दिन पहले 'नबाजौबन दर्शन' के लिए नए कपड़ों में दोबारा प्रकट होते हैं। रथ यात्रा के दिन देवता भव्य रथों में सवार होकर अपनी मौसी के घर गुंडिचा मंदिर जाते हैं। यहां लाखों श्रद्धालु उनके दर्शन के लिए इकट्ठे होते हैं। इस साल रथ यात्रा उत्सव 27 जून को मनाया जाएगा।