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MP में मोहन सरकार का बड़ा फैसला, कैबिनेट ने UCC ड्राफ़्ट को दी मंजूरी

मध्य प्रदेश में मोहन यादव सरकार ने बड़ा फैसला लिया है. जिसके तहत यूनिफॉर्म सिविल कोड बिल (UCC) के ड्रॉफ्ट को कैबिनेट में मंजूरी दे दी गई है. अब यह ड्रॉफ्ट आगामी विधानसभा के मानसून सत्र में पेश किया जाएगा. कैबिनेट की बैठक के बाद मुख्यमंत्री मोहन यादव ने कहा कि आज कैबिनेट ने यूनिफॉर्म सिविल कोड बिल, 2026 को पूरे दिल से और सर्वसम्मति से मंजूरी दे दी है.

मुख्यमंत्री ने कहा कि मैं अपने सम्मानित कैबिनेट सहयोगियों और आप सभी को बधाई देना चाहता हूं. हमने इस दिशा में कदम बढ़ाया है और यह सुनिश्चित किया है कि बिल 20 जुलाई से शुरू होने वाले विधानसभा सत्र में पेश किए जाने के लिए तैयार हो. हमारे लिए, समानता हमेशा से भारतीय संस्कृति और मूल्यों का एक अहम हिस्सा रही है.

उन्होंने कहा कि यह ड्राफ्ट बिल समाज के सभी वर्गों से सुझाव लेकर तैयार किया गया था और समाज के ज़्यादातर लोगों ने इसका समर्थन किया है. यह आदिवासी समुदायों को छोड़कर समाज के सभी वर्गों पर लागू होगा. पुरुषों के लिए शादी की उम्र 21 साल और महिलाओं के लिए 18 साल है, और UCC के तहत शादी का रजिस्ट्रेशन ज़रूरी है.

राज्य कैबिनेट ने रविवार को भोपाल में मुख्यमंत्री यादव की अध्यक्षता में हुई बैठक में इस ड्राफ्ट बिल को मंजूरी दी. मध्य प्रदेश के लिए यूनिफॉर्म सिविल कोड का ड्राफ्ट तैयार करने के लिए सरकार ने कई सदस्यों वाली एक कमेटी बनाई थी, जिसके प्रमुख सुप्रीम कोर्ट की रिटायर्ड जज रंजना प्रकाश देसाई थीं. इस कमेटी ने हाल ही में मुख्यमंत्री को अपनी रिपोर्ट सौंपी, जिसमें सुझाव दिया गया कि अनुसूचित जनजातियों (आदिवासियों) को UCC के दायरे से बाहर रखा जाए.

इस हाई-लेवल पैनल को शादी, तलाक, गुज़ारा-भत्ता, विरासत, गोद लेने और लिव-इन रिलेशनशिप जैसे अलग-अलग पर्सनल और पारिवारिक मामलों से जुड़ी मौजूदा व्यवस्थाओं का अध्ययन करने का काम सौंपा गया था. इसके आधार पर कमेटी ने मध्य प्रदेश की सामाजिक, सांस्कृतिक और आर्थिक स्थितियों के अनुसार एक ड्राफ्ट तैयार किया. पहले जारी एक बयान के अनुसार, पैनल ने जौंडर इक्वालिटी (स्त्री-पुरुष समानता) सुनिश्चित करने, अलग-अलग रस्मों-रिवाजों पर कोई असर न पड़ने देने, प्रचलित रीति-रिवाजों और परंपराओं का सम्मान करने, और संवैधानिक प्रावधानों व सार्वजनिक नीति का ध्यान रखने की दिशा में काम किया है.