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अयोध्या में लगेंगे 40 लाख से ज्यादा पौधे, पूरे प्रदेश में रोपे जाएंगे 37 करोड़ से अधिक पौधे

अयोध्या: उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में अयोध्या एक बार फिर पर्यावरण संरक्षण की दिशा में मिसाल बनने जा रहा है। आगामी 9 जुलाई को मुख्यमंत्री अयोध्या के रामपुर हलवारा में सरयू तट के पास वन महोत्सव का शुभारंभ करेंगे। इस अवसर पर 8 हेक्टेयर क्षेत्र में 12 हजार पौधे रोपे जाएंगे और इसे त्रिवेणी वन के रूप में विकसित किया जाएगा। कार्यक्रम में 3 मिनट 43 सेकंड की तिलोदकी गंगा के पुनरुद्धार पर लघु फिल्म दिखाई जाएगी। उसके बाद मुख्यमंत्री योगी पर्यावरण जागरूकता पर जनसभा को संबोधित भी करेंगे। यह आयोजन न केवल हरियाली बढ़ाने का एक प्रयास है, बल्कि पर्यावरणीय जिम्मेदारी के प्रति जनमानस को जागरूक करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है।

‘एक पेड़ मां के नाम 2.0’ से भावनात्मक जुड़ाव
इस वर्ष वन महोत्सव के दौरान ‘एक पेड़ मां के नाम 2.0’ अभियान को विशेष बल दिया गया है। इस अभियान के तहत लोग अपनी मां के नाम पर पौधे लगा रहे हैं। अकेले वन विभाग को 13 लाख पौधे लगाने का लक्ष्य दिया गया है। वहीं, कुल 26 विभाग मिलकर 40 लाख से अधिक पौधों का सामूहिक रोपण करेंगे। वहीं प्रदेश में कुल 37 करोड़ से अधिक पौधरोपण का लक्ष्य है। यह संयुक्त प्रयास जलवायु परिवर्तन, पर्यावरणीय असंतुलन और प्रदूषण जैसी वैश्विक समस्याओं से निपटने की दिशा में अहम कदम है। उप प्रभागीय वन अधिकारी एन. सुधीर के अनुसार, कार्यक्रम की तैयारियां पूरे जोर-शोर से चल रही हैं।

240 अमृत सरोवरों के किनारे भी होंगे पौधारोपण
अयोध्या जिले के 240 अमृत सरोवरों के किनारे भी पौधारोपण किया जाएगा। अमृत सरोवर योजना के अंतर्गत बनाए गए ये जलाशय जल संरक्षण के साथ-साथ अब हरियाली को भी संजोएंगे। इन जल निकायों के किनारे पौधों की श्रृंखला जैव विविधता और स्थानीय पारिस्थितिकी तंत्र को मजबूती देगी। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ अयोध्या को न सिर्फ धार्मिक और सांस्कृतिक केंद्र के रूप में पहचान दिला रहे हैं, बल्कि अयोध्या सहित पूरे प्रदेश को एक हरित और सतत पर्यावरणीय मॉडल के रूप में भी स्थापित कर रहे हैं। यह अभियान आने वाली पीढ़ियों के लिए एक स्वच्छ, हरित और टिकाऊ भविष्य का रास्ता तैयार करेगा।

स्थानीय भागीदारी: जनसहयोग से हरियाली की ओर
इस महाअभियान में जनसहभागिता को प्राथमिकता दी गई है। आम नागरिक, छात्र, स्वयंसेवी संगठन, स्कूल-कॉलेज, सामाजिक संस्थाएं- सभी को इस अभियान में भाग लेने के लिए प्रेरित किया जा रहा है। इससे पर्यावरण के प्रति समाज में जागरूकता बढ़ेगी और भावनात्मक जुड़ाव भी कायम होगा।