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गुजरात की महिलाएं बनीं ‘लखपति दीदी’, सशक्तिकरण और आर्थिक सफलता की मिसाल

Gujarat: सूरत की रेखाबेन गामिट टीफिन पैकिंग में व्यस्त हैं। सखी मंडल से जुड़ने के बाद उन्हें नए अवसर मिले और वे आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बन गई हैं। इस सफलता के कारण रेखाबेन ‘लखपति दीदी’ के रूप में पहचानी जाने लगी हैं।

सूरत की निमिषा बहन पटेल भी मिशन मंगलम योजना के तहत सखी मंडल से जुड़ी और मंगलम कैंटीन शुरू की। वे अपने परिवार को आर्थिक मजबूती प्रदान कर रही हैं और इस योजना की सफलता का जीता-जागता उदाहरण बन चुकी हैं।

‘लखपति दीदी’ का उद्देश्य स्वयं सहायता समूहों की महिलाओं को सशक्त बनाना और सतत आजीविका के माध्यम से उनके घरेलू आय को प्रति वर्ष 1,00,000 रुपये से अधिक बढ़ाना है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन में, 2023 में लखपति दीदी योजना की शुरुआत हुई, जिसका लक्ष्य 2027 तक 3 करोड़ महिलाओं को आर्थिक रूप से सक्षम बनाना है।

वीओ: गुजरात की महिलाओं तक योजना का अधिकतम लाभ पहुँचाने के लिए मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल के नेतृत्व में प्रभावी और संगठित प्रयास किए गए। जुलाई 2025 तक राज्य में लगभग 5 लाख 96 हजार महिलाओं की आय एक लाख रुपये से अधिक हो गई और वे गर्व के साथ लखपति दीदी बन चुकी हैं।

राज्य का लक्ष्य है कि आने वाले समय में गुजरात की 10 लाख महिलाओं को लखपति दीदी बनाकर महिला सशक्तिकरण का एक अभूतपूर्व उदाहरण स्थापित किया जाए।