नई दिल्ली: केंद्रीय संचार मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने कहा कि भारत अब 6G तकनीक के वैश्विक मानक तय करने में अग्रणी भूमिका निभाने की स्थिति में है। उन्होंने बताया कि भारत 6G एलायंस के माध्यम से देश सात वर्किंग ग्रुप्स के जरिए इस दिशा में तेजी से काम कर रहा है। सिंधिया ने कहा कि 6G तकनीक में अपार संभावनाएं हैं, जो न केवल डिजिटल डिवाइड को खत्म करेगी बल्कि देश के लिए नए अवसर भी पैदा करेगी।
लोकसभा में मोबाइल टावर कनेक्टिविटी पर सवालों के जवाब में मंत्री ने बताया कि पिछले 12 वर्षों में भारत के टेलीकॉम सेक्टर ने वैश्विक स्तर पर मजबूत पहचान बनाई है। उन्होंने कहा कि डेटा की औसत कीमत 2014 में 290 रुपये से घटकर अब करीब 8 रुपये रह गई है, यानी लगभग 97 प्रतिशत की कमी आई है। इंफ्रास्ट्रक्चर के विस्तार पर उन्होंने बताया कि देश में बेस ट्रांसीवर स्टेशनों (BTS) की संख्या 2014 के 6 लाख से बढ़कर अब 32 लाख हो गई है। साथ ही 5G सेवा देश के 99.9 प्रतिशत जिलों तक पहुंच चुकी है और लगभग 40 करोड़ यूजर्स इसका इस्तेमाल कर रहे हैं।
सीमावर्ती इलाकों में कनेक्टिविटी को लेकर सिंधिया ने कहा कि 2014 में जहां केवल 42 प्रतिशत गांवों में नेटवर्क था, वहीं अब 17,600 में से 17,222 गांवों तक कनेक्टिविटी पहुंच चुकी है, जो करीब 98 प्रतिशत कवरेज है। सरकारी टेलीकॉम कंपनी BSNL को लेकर उन्होंने बताया कि 18 साल बाद कंपनी ने 2024-25 में एक तिमाही में 280 करोड़ रुपये का शुद्ध मुनाफा दर्ज किया है। इसके साथ ही यूजर्स की संख्या 8.5 करोड़ से बढ़कर 9.27 करोड़ हो गई है और नेटवर्क अपटाइम भी बेहतर हुआ है।
सिंधिया ने यह भी बताया कि भारत ने 4G तकनीक के लिए विदेशी उपकरण खरीदने के बजाय खुद का सिस्टम विकसित करने का कठिन लेकिन महत्वपूर्ण फैसला लिया। उन्होंने कहा कि दुनिया में केवल चार देश ही टेलीकॉम उपकरण बनाते हैं और अब भारत भी इस सूची में शामिल हो गया है, जिससे देश वैश्विक स्तर पर अपनी तकनीकी क्षमता साबित कर रहा है।