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फरवरी में भारत का व्यापार घटकर 27.1 अरब डॉलर, सोने के आयात में भारी गिरावट से राहत

नई दिल्ली: भारत का मर्चेंडाइज ट्रेड डेफिसिट फरवरी 2026 में घटकर 27.1 अरब डॉलर रह गया, जो जनवरी के 34.7 अरब डॉलर के मुकाबले काफी कम है। Union Bank of India के अनुसार, यह सुधार मुख्य रूप से सोने और नॉन-ऑयल नॉन-गोल्ड (NONG) आयात में तेज गिरावट के कारण हुआ।
बता दे की, आयात में कुल मिलाकर बड़ी कमी आई है, जिसमें सोने के आयात में करीब 40% की गिरावट, NONG में लगभग 19% की कमी और तेल आयात में हल्की गिरावट दर्ज की गई। इसके चलते व्यापार घाटा कम हुआ। वैश्विक व्यापार तनाव के बावजूद, भारत के निर्यात (सामान और सेवाएं दोनों) मजबूत बने रहे। वही, वित्त वर्ष 2026 में निर्यात ने स्थिर प्रदर्शन दिखाया है।

आंकड़ों के मुताबिक, सोने का घाटा घटकर 7.78 अरब डॉलर रह गया, जो जनवरी में 12.96 अरब डॉलर था। वहीं नॉन-ऑयल नॉन-गोल्ड घाटा भी घटकर 9.78 अरब डॉलर हो गया, जिसमें मशीनरी, केमिकल और मेटल जैसे सेक्टर में सुधार देखने को मिला। हालांकि, तेल घाटा अभी भी ऊंचे स्तर पर बना हुआ है और यह 9.54 अरब डॉलर रहा। सेवाओं के क्षेत्र ने अर्थव्यवस्था को मजबूत सहारा दिया है। फरवरी में सर्विसेज ट्रेड सरप्लस बढ़कर 23.15 अरब डॉलर हो गया, जिससे कुल व्यापार संतुलन को मजबूती मिली।

इसी वजह से कुल व्यापार घाटा (गुड्स और सर्विसेज मिलाकर) घटकर 3.95 अरब डॉलर रह गया, जो पिछले महीने 13.15 अरब डॉलर था। व्यापार घाटे में कमी का सबसे बड़ा कारण सोने की मांग में गिरावट रही, जो पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के कारण कीमतों में उतार-चढ़ाव से प्रभावित हुई। साथ ही, पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के चलते कमोडिटी कीमतों, खासकर तेल की कीमतों में वृद्धि से व्यापार घाटा फिर बढ़ सकता है। रिपोर्ट के मुताबिक, तेल की कीमत में हर 10 डॉलर प्रति बैरल की बढ़ोतरी से भारत के चालू खाते पर लगभग 15 अरब डॉलर का असर पड़ सकता है।

हालांकि, मजबूत सर्विसेज निर्यात इस दबाव को कुछ हद तक कम कर सकता है, लेकिन कमोडिटी कीमतों में उतार-चढ़ाव के कारण जोखिम अभी भी बना हुआ है।