चारधाम यात्रा केवल एक साधारण धार्मिक यात्रा नहीं, बल्कि हिंदू धर्म में वर्णित एक पवित्र शास्त्रीय विधान है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार यह यात्रा यमुनोत्री धाम से आरंभ होकर गंगोत्री, केदारनाथ और अंत में बद्रीनाथ धाम पर जाकर पूर्ण होती है। शास्त्रों में वर्णित इस क्रम का विशेष महत्व है, जिसे श्रद्धालु सदियों से निभाते आ रहे हैं।
इस वर्ष चारधाम यात्रा को लेकर भक्तों में खासा उत्साह देखने को मिल रहा है। बद्रीनाथ धाम के कपाट पिछले वर्ष की तुलना में 11 दिन पहले, यानी 23 अप्रैल को श्रद्धालुओं के दर्शनार्थ खोले जाएंगे। वहीं केदारनाथ धाम के कपाट खुलने की तिथि महाशिवरात्रि के पावन अवसर पर विधिवत घोषणा की जाएगी।
चारधाम यात्रा न केवल आध्यात्मिक शांति और मोक्ष की कामना से जुड़ी है, बल्कि यह उत्तराखंड की सांस्कृतिक और धार्मिक विरासत का भी प्रतीक है। हर वर्ष लाखों श्रद्धालु कठिन भौगोलिक परिस्थितियों के बावजूद इन धामों तक पहुंचते हैं। पिछले वर्ष चारों धामों में 33 लाख से अधिक श्रद्धालुओं ने दर्शन कर नया कीर्तिमान स्थापित किया था, जो इन पवित्र स्थलों की बढ़ती आस्था और लोकप्रियता का प्रमाण है। राज्य सरकार और प्रशासन भी यात्रा को सुरक्षित और सुव्यवस्थित बनाने के लिए तैयारियों में जुटे हैं, ताकि देश-विदेश से आने वाले श्रद्धालुओं को किसी प्रकार की असुविधा न हो।