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मध्य-पूर्व में संघर्ष का 14वां दिन, तेल की कीमतों में उछाल, वैश्विक तनाव बढ़ा

अमेरिका-इजराइल द्वारा ईरान के खिलाफ शुरू किया गया युद्ध चौदहवें दिन जारी है और फिलहाल तनाव कम होने के कोई संकेत नहीं दिख रहे हैं। अमेरिकी और इजराइली सेनाओं ने पूरे ईरान में हजारों हमले किए हैं, जिनमें सैन्य ठिकानों और परमाणु ठिकानों को निशाना बनाया गया है। वहीं ईरान का कहना है कि हमलों में उसके नागरिक ठिकानों को भी निशाना बनाया जा रहा है।

ईरान के नए सर्वोच्च नेता अयातुल्ला मोजतबा खामेनेई ने अपने पिता का पद संभालने के बाद पहला बयान जारी कर कहा कि ईरान खाड़ी देशों पर हमले जारी रखेगा। साथ ही उन्होंने युद्ध में ‘‘नए मोर्चे’’ खोलने की धमकी भी दी। इस युद्ध ने वैश्विक ऊर्जा बाजार को हिलाकर रख दिया है। कुछ समय की राहत के बाद, तेल की कीमतें फिर से 100 अमेरिकी डॉलर प्रति बैरल से ऊपर चढ़ गई हैं।

होर्मुज जलडमरूमध्य तेल टैंकरों के लिए काफी हद तक बंद है, क्योंकि ईरान ने इसे बंद रखने की बात बार-बार दोहराई है। इस जलमार्ग से हर रोज दुनिया के कुल तेल खपत का लगभग 20 फीसदी यानी पांचवां हिस्सा गुजरता है। दुनिया भर में तेल आपूर्ति को बनाए रखने के लिए, ट्रंप प्रशासन ने भारत को छूट दिए जाने के बाद अन्य देशों को भी इस समय समुद्र में फंसे रूसी तेल की खरीद की अस्थायी अनुमति दिए जाने का ऐलान किया है।

इस बीच, ईरान संघर्ष में जान गंवाने वालों की संख्या लगातार बढ़ती जा रही है। ईरान में 1,300 से ज्यादा और लेबनान में 600 से ज्यादा लोग मारे गए हैं। संयुक्त राष्ट्र का अनुमान है कि ईरान में लगभग 32 लाख लोग विस्थापित हुए हैं।