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तेल कीमतों के दबाव में अमेरिका का बड़ा फैसला, रूसी तेल की खरीद को फिर दी अनुमति

मध्य पूर्व में जारी युद्ध के कारण तेल की कीमतों में तेज उछाल का खतरा बढ़ गया है। इसी दबाव के बीच अमेरिका ने एक बड़ा कदम उठाते हुए समुद्र में पहले से जा रहे रूसी तेल के कार्गो को खरीदने की दूसरी बार अनुमति दे दी है। अमेरिकी सरकार का कहना है कि यह फैसला तेल बाजार में बढ़ते तनाव और कीमतों को काबू में रखने के लिए लिया गया है।

अमेरिकी ट्रेजरी सचिव स्कॉट बेसेंट ने सोशल मीडिया पोस्ट में कहा कि यह फैसला “सीमित और थोड़े समय के लिए” है। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह छूट केवल उस रूसी तेल पर लागू होगी जो 12 मार्च से पहले जहाजों पर लादा जा चुका है और पहले से समुद्र में जा रहा है। बेसेंट ने कहा कि इस फैसले से रूस की सरकार को कोई बड़ा आर्थिक फायदा नहीं होगा।

अमेरिका इससे पहले भारत को भी ऐसी ही एक महीने की छूट दे चुका है। यह छूट 5 मार्च से पहले जहाजों पर लदे रूसी कच्चे तेल के लिए दी गई थी। हालांकि नई व्यवस्था में एक साफ शर्त रखी गई है- ईरान इस तेल को नहीं खरीद सकेगा। तेल और ईंधन की तेजी से बढ़ती कीमतों को रोकने के लिए अमेरिका कई विकल्पों पर विचार कर रहा है। इनमें एक बड़ा कदम यह भी हो सकता है कि एक पुराने समुद्री कानून को अस्थायी रूप से हटाया जाए। इस कानून के मुताबिक अमेरिका के बंदरगाहों के बीच सामान ले जाने के लिए अमेरिकी जहाजों का ही इस्तेमाल करना जरूरी है।

इन सभी कोशिशों के बावजूद तेल बाजार में दबाव बना हुआ है। शुक्रवार को एशियाई कारोबार के शुरुआती समय में ब्रेंट कच्चे तेल की कीमत करीब 100 डॉलर प्रति बैरल के आसपास पहुंच गई। स्कॉट बेसेंट पहले भी संकेत दे चुके हैं कि अगर तेल की कीमतें बहुत तेजी से बढ़ती हैं तो अमेरिका रूस के तेल पर लगे कुछ प्रतिबंधों को ढीला कर सकता है।

अगर ईरान होर्मुज जलडमरूमध्य में तेल टैंकरों पर हमले बढ़ाता है, तो तेल की कीमतें और बढ़ सकती हैं। ऐसे में रूस पर लगे प्रतिबंध हटाने का दबाव भी बढ़ेगा। बेसेंट ने गुरुवार को कहा कि अमेरिका के इस कदम से रूस को जो भी फायदा होगा, वह “दुर्भाग्यपूर्ण लेकिन अस्थायी” होगा। उन्होंने कहा कि उम्मीद है कि रूस को इससे बहुत कम समय के लिए ही लाभ मिलेगा।