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सऊदी अरब ने मार गिराए 50 ड्रोन, ईरान-इजराइल तनाव के बीच मिडिल ईस्ट में हालात और गंभीर

सऊदी अरब ने कहा है कि उसके एयर डिफेंस सिस्टम ने शुक्रवार तड़के कुछ ही घंटों के भीतर उसके हवाई क्षेत्र में घुसे करीब 50 ड्रोन को मार गिराया। सऊदी रक्षा मंत्रालय ने बताया कि ड्रोन को उनके निशाने तक पहुंचने से पहले ही नष्ट कर दिया गया। इतने बड़े पैमाने पर ड्रोन का हमला सऊदी अरब के लिए असामान्य और गंभीर खतरा माना जा रहा है। क्षेत्र में बढ़ते तनाव के बीच सऊदी अरब के कई अहम स्थानों को खतरा बताया गया है। इनमें रियाद स्थित अमेरिकी दूतावास, प्रमुख तेल ढांचे और अमेरिकी सैनिकों वाला एक सैन्य अड्डा शामिल हैं।

इस बीच इजराइल ने ईरान की राजधानी तेहरान पर नए हमले शुरू कर दिए हैं। इजराइली सेना ने कहा कि अमेरिका के साथ मिलकर चलाए जा रहे अभियान के 14वें दिन शुक्रवार सुबह तेहरान में ईरानी शासन से जुड़े ढांचे को निशाना बनाकर बड़े पैमाने पर हमले किए गए। वहीं इजराइल ने लेबनान में भी कार्रवाई जारी रखी है। इजराइली सेना ने लितानी नदी पर बने अल-जरारिया ब्रिज पर हमला किया। इजराइल का कहना है कि इस पुल का इस्तेमाल हिजबुल्लाह संगठन उत्तर से दक्षिण लेबनान में आवाजाही और इजराइल के खिलाफ हमलों की तैयारी के लिए करता था।

इजराइली सेना के अनुसार, इस पुल को नष्ट करना जरूरी था ताकि इजराइल के नागरिकों को खतरे से बचाया जा सके और लेबनान के आम लोगों को भी नुकसान से रोका जा सके। उधर, अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भी ईरान के खिलाफ चल रहे अभियान को लेकर कड़ा बयान दिया है। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ सोशल पर लिखा कि अमेरिका सैन्य और आर्थिक रूप से ईरान के शासन को पूरी तरह कमजोर कर रहा है।

ट्रंप ने दावा किया कि ईरान की नौसेना और वायुसेना को भारी नुकसान पहुंचा है और अमेरिका के पास बेहद ताकतवर हथियार और पर्याप्त संसाधन मौजूद हैं। अमेरिकी प्रशासन ने यह पूरी तरह अनुमान नहीं लगाया था कि सैन्य हमलों के जवाब में ईरान हॉर्मुज जलडमरूमध्य को बंद करने की कोशिश कर सकता है। यह जलमार्ग दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल परिवहन मार्गों में से एक माना जाता है। अगर हॉर्मुज जलडमरूमध्य बंद होता है तो इसका वैश्विक तेल सप्लाई और अर्थव्यवस्था पर बड़ा असर पड़ सकता है।