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बॉक्स ऑफिस से बैलेट बॉक्स तक... क्या विजय अपनी स्टारडम को वोटों में बदल पाएंगे?

New Delhi: तमिलनाडु में सिनेमा और सियासत के बीच हमेशा से चोली-दामन का साथ रहा है। पहले भी फिल्मी सितारों ने सियासत की दहलीज पार की है। कभी कामयाब रहे हैं तो कभी नाकामी हाथ लगी है। राजनीति के मैदान में नए खिलाड़ी हैं - विजय। सवाल ये नहीं है कि वे कितने लोकप्रिय हैं। सवाल है कि क्या उनकी लोकप्रियता वोटों में तब्दील होगी?

विजय ने सिनेमा जगत में पिता, एस. ए. चंद्रशेखर के निर्देशन में कदम रखा। तमिल फिल्म उद्योग में उनके शुरुआती साल अनिश्चितता भरे थे। उन्हें लुक्स, स्क्रीन प्रेजेंस और यहां तक कि अभिनय में गंभीरता के अभाव को लेकर भारी आलोचनाओं का सामना करना पड़ा।

बुलंद हौसले रंग लाने लगे। धीरे-धीरे लोगों की सोच बदलने लगी। समय का पहिया आगे बढ़ा तो फिल्मों में ना सिर्फ उनकी पहचान लोकप्रिय एक्शन स्टार के रूप में बनी, बल्कि वे एक ऐसे नायक के रूप में भी उभरे, जिसके किरदारों में नैतिक संदेश होते थे। लोकप्रियता बढ़ी, तो उनकी फिल्मों के राजनैतिक संदेशों को नजरअंदाज करना मुश्किल हो गया। हालांकि ये बात एक वर्ग को नागवार भी गुजरी।

2010 के दशक तक, विजय स्टार के रूप में अपनी पहचान बना चुके थे। एक ऐसा स्टार, जिसकी छवि औरों से अलग थी। लोगों ने इसे बाद में महसूस किया। तमिलनाडु ऐसे बदलाव भरे सफर देखने का आदी है - स्टार से राजनेता तक, "इलय तलपति" से पार्टी नेता तक, बॉक्स ऑफिस के बादशाह से चुनावी दावेदार तक का सफर।

उनके सामाजिक संगठन और फैन क्लब - विजय मक्कल इयकम - ने कई काम किए। रक्तदान शिविर, राहत के काम और ट्यूशन सेंटर चलाने जैसे काम। ये बदलाव सूक्ष्म, लेकिन रणनीतिक था। विजय को मशहूर सितारे की छवि से निकालकर आम लोगों के बीच सक्रिय भूमिका निभाने का बदलाव था।

विजय ने फरवरी 2024 में, अपनी राजनीतिक पार्टी - तमिलगा वेट्री कड़गम बनाने का ऐलान कर दिया। फौरन इसका असर दिखना शुरू हो गया। उनकी रैलियों में भारी भीड़ होती। सोशल मीडिया पर समर्थकों की भरमार हो गई। सिनेमा से सियासत में कदम रखने के बावजूद उन्हें प्रशंसकों का प्यार मिलता रहा। फिर भी जानकारों को शक है कि रैलियों में उमड़ने वाली भीड़ वोटों में तब्दील होगी या नहीं?

विजय का अब तक का सियासी सफर उनकी फिल्मों की तरह उतार-चढ़ाव भरा रहा है। उनकी पार्टी टीवीके आरोप लगाती है कि उनके सम्मेलनों और रैलियों को सरकार से इजाजत लेने में परेशानी होती है। उधर, डीएमके सरकार की दलील है कि चूंकि विजय की रैलियों में भारी भीड़ जुटती है, लिहाजा कुछ सावधानियां बरतनी जरूरी हैं।

सितंबर 2025 में, करूर में टीवीके की रैली थी। रैली में भारी भगदड़ मची और 41 लोगों को जान से हाथ धोना पड़ा। भगदड़ के बाद विजय के इस वीडियो की काफी आलोचना हुई। कई लोगों ने इसे फिल्मी करार देकर खारिज कर दिया।

अभिनेता से नेता बने विजय पर उस भगदड़ के मामले में सीबीआई जांच चल रही है। उन्हें अब तक पूछताछ के लिए दिल्ली के सीबीआई मुख्यालय में तीन बार पेश होना पड़ा है। राजनीति में कदम रखने के साथ विजय अपनी तुलना दिवंगत एमजीआर से करने लगे थे। चाहे सिनेमा से राजनीति का सफर हो या फिर साझा प्रतिद्वंदी - डीएमके का। फिर भी आलोचकों को शक है कि ये खासियत चुनावों में मददगार साबित होगी।

तमिलनाडु की राजनीति में विजय की संभावित अहमियत को समझने के लिए, राज्य की सियासी आबोहवा को परखना जरूरी है। इसकी गहराई में ताकतवर जिला नेटवर्क है, बूथ स्तर की समितियां हैं और मजबूत गठबंधन का समीकरण है। तमिलनाडु के मतदाताओं को राजनीति का अच्छा तजुर्बा है। उन्होंने शख्सियत आधारित आंदोलनों को चढ़ते और गिरते हुए देखा है।

सवाल पार्टी को लेकर भी है। सवाल है कि टीवीके में फैसलों का आधार क्या होता है? पार्टी के सामने एक और चुनौती है - चुनावी राजनीति में अनुभवी नेताओं की कमी। नई-नवेली पार्टी के ज्यादातर कार्यकर्ता भी युवा हैं।
टीवीके के चुनावी घोषणापत्र में विजय की छवि अवाम के 'भाई' के रूप में पेश की गई है। चाहे युवतियों को शादी के तोहफे के रूप में सोना और रेशमी साड़ी देने का ऐलान हो, या फिर तमिलनाडु में पैदा होने वाले हर बच्चे को 'थाई मामा' या मामा की ओर से सोने की अंगूठी और शिशु स्वागत किट का वादा।

जैसे-जैसे विजय का राजनीतिक कद बढ़ रहा है, वैसे-वैसे उनके निजी जीवन की पड़ताल भी तेज हो रही है। विजय का निजी जीवन पहले से कहीं ज्यादा सुर्खियों में है। उनकी पत्नी संगीता विजय ने हाल में चेन्नई की एक अदालत में तलाक के लिए याचिका दायर की है। उन्होंने अपने पति पर एक अभिनेत्री के साथ विवाहेतर रिश्तों और उन्हें "लगातार मानसिक तनाव देने और नजरंदाज करने के आरोप लगाए हैं।

विजय को कॉलीवुड अभिनेत्री तृषा के साथ एक शादी में देखा गया, जिससे अटकलों को हवा मिली। एक साथ दोनों की मौजूदगी को लेकर सोशल मीडिया पर चर्चा चलने लगी। इस मुद्दे पर ना तो विजय ने कुछ कहा और ना तृषा ने। दोनों ने लोकप्रिय फिल्मों लियो और घिल्ली में साथ काम किया है। तृषा ने 2024 में विजय की फिल्म गोट में एक खास भूमिका भी निभाई थी।

सबसे गहरा सवाल है कि रील लाइफ में दिलों पर राज करने वाला शख्स रियल लाइफ में राज कायम कर पाता है या नहीं। फैसला चार मई 2026 को सामने होगा।