भारत के विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने ईरान के विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराघची से एक बार फिर बातचीत की। दोनों नेताओं के बीच द्विपक्षीय मुद्दों और ब्रिक्स (BRICS) से जुड़े विषयों पर चर्चा हुई। जयशंकर ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर जानकारी देते हुए लिखा कि उन्होंने गुरुवार रात ईरानी विदेश मंत्री से बातचीत की और दोनों देशों से जुड़े मामलों के साथ-साथ ब्रिक्स से जुड़े मुद्दों पर भी बात की।
यह बातचीत उस समय हुई है जब अमेरिका और इजराइल बनाम ईरान के बीच संघर्ष जारी है। मौजूदा तनाव शुरू होने के बाद दोनों नेताओं के बीच यह चौथी बातचीत है। इससे पहले हुई बातचीत में समुद्री जहाजों की सुरक्षा और भारत की ऊर्जा सुरक्षा जैसे मुद्दों पर भी चर्चा की गई थी। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने प्रेस ब्रीफिंग में बताया कि दोनों नेताओं ने क्षेत्र में जहाजों की सुरक्षित आवाजाही और ऊर्जा आपूर्ति को स्थिर बनाए रखने पर बात की।
उन्होंने कहा कि पिछले कुछ दिनों में दोनों विदेश मंत्रियों के बीच तीन बार बातचीत हो चुकी है और बातचीत में मुख्य रूप से शिपिंग की सुरक्षा और भारत की ऊर्जा जरूरतों से जुड़े मुद्दे शामिल रहे। इस बीच इजराइली वायुसेना (IAF) ने दावा किया है कि उसने ईरान के कई शहरों में बड़े पैमाने पर हमले किए हैं। इजराइल के अनुसार तेहरान, शिराज और अहवाज में ईरानी शासन से जुड़े कई ठिकानों को निशाना बनाया गया।
इजराइल ने बताया कि शिराज में एक भूमिगत ठिकाने पर हमला किया गया, जहां कथित तौर पर बैलिस्टिक मिसाइलों का निर्माण और भंडारण किया जा रहा था। वहीं तेहरान में एयर डिफेंस सिस्टम के ठिकानों को भी निशाना बनाया गया। इजराइली सेना के मुताबिक इन हमलों में हथियार बनाने वाले कई ठिकाने, एयर डिफेंस सिस्टम और मिसाइल से जुड़े उपकरण भी नष्ट किए गए। इसके अलावा पश्चिमी ईरान के अहवाज शहर में कई सरकारी मुख्यालयों पर भी हमले किए गए।
बताया जा रहा है कि अमेरिका और इजराइल के संयुक्त सैन्य अभियान में ईरान के पूर्व सर्वोच्च नेता आयतुल्ला अली खामेनेई की मौत के बाद पश्चिम एशिया में तनाव और बढ़ गया है। इसके जवाब में ईरान ने खाड़ी क्षेत्र के कई देशों में अमेरिकी और इजराइली ठिकानों को निशाना बनाया, जिससे महत्वपूर्ण समुद्री रास्तों और वैश्विक ऊर्जा बाजार पर असर पड़ा है। अब युद्ध को 14 दिन हो चुके हैं और दोनों पक्षों के बीच हमले जारी हैं। इस बीच ईरान की ओर से हॉर्मुज जलडमरूमध्य को बंद करने की चेतावनी भी दी गई है, जिससे दुनिया के कई देशों की ऊर्जा आपूर्ति प्रभावित हो सकती है।