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ब्रिटेन की विस्तारित ‘पहले निर्वासन, फिर अपील’ सूची में भारत भी शामिल, क्या है इसके मायने?

London: भारत को ब्रिटेन सरकार ने उन देशों की विस्तारित सूची में शामिल किया है, जिसमें विदेशी अपराधियों को सजा सुनाए जाने के बाद और उनकी अपील सुने जाने से पहले ही निर्वासित किया जाएगा। ये कदम ब्रिटेन में बढ़ते आव्रजन पर अंकुश लगाने के उपायों के तहत उठाया गया है।

ब्रिटेन के गृह मंत्रालय ने रविवार को ऐलान किया कि उसकी ‘डिपोर्ट नाउ अपील लेटर’ योजना का दायरा मौजूदा आठ देशों से बढ़ाकर 23 देशों तक किया जाएगा। इन देशों के नागरिकों को अपील दाखिल करने से पहले ही उनके देश वापस भेजा जाएगा। वो वहां से वीडियो तकनीक के जरिए सुनवाई में शामिल हो सकेंगे।

इस योजना के तहत 2023 में कंजर्वेटिव पार्टी की सरकार के वक्त गृह मंत्री सुएला ब्रेवरमैन ने जिन आठ देशों को शामिल किया था उनमें फिनलैंड, नाइजीरिया, एस्तोनिया, अल्बानिया, बेलीज, मॉरीशस, तंजानिया और कोसोवो थे।

अब भारत को ऑस्ट्रेलिया, कनाडा, इंडोनेशिया, केन्या, मलेशिया और जाम्बिया सहित 14 दूसरे देशों के साथ सूची में जोड़ा जाएगा। नयी व्यवस्था के तहत अपराधियों को जेल से सीधे प्रत्यर्पित कर दिया जाएगा और उन्हें ब्रिटेन में दोबारा प्रवेश की अनुमति नहीं होगी।

हालांकि, आतंकवादियों, हत्यारों और उम्रकैद की सजा पाए अपराधियों को पूरी सजा काटनी होगी। आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक ब्रिटेन की जेल में बंद लोगों में विदेशी अपराधियों की हिस्सेदारी लगभग 12 फीसदी है। साथ ही जेलों पर हर साल औसतन 54 हजार पाउंड का खर्च आता है।