ईरान के खिलाफ अमेरिका-इजरायल हमले का आज चौथा दिन है। इजरायल और अमेरिकी सेनाओं की ओर से सोमवार रात ईरान के अहम ठिकानों पर मिसाइलें दागी गईं। वहीं ईरान ने भी इजरायल पर जवाबी कार्रवाई की। इस बीच ईरान ने घातक कदम उठाया है। ईरान ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को बंद करने का ऐलान किया है। ईरान ने सोमवार को कहा कि होर्मुज स्ट्रेट बंद है और वहां से गुजरने का प्रयास करने वाले किसी भी जहाज को छोड़ा नहीं जाएगा। ईरान ने चेतावनी दी है कि अगर उनकी बातों को नजरअंदाज किया जाता है तो इसका अंजाम बुरा होगा। वहां से गुजरने वाले जहाज को आग के हवाले कर दिया जाएगा।
इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) के कमांडर-इन-चीफ के एक सीनियर सलाहकार ब्रिगेडियर जनरल सरदार इब्राहिम जबारी ने कहा, 'स्ट्रेट ऑफ होर्मुज बंद है। अगर इसे कोई पार करने की कोशिश करता है तो रिवोल्यूशनरी गार्ड्स के हीरो और रेगुलर नेवी उन जहाजों को आग लगा देंगे।' स्ट्रेट ऑफ होर्मुज एक बेहद संकरा समुद्री रास्ता है, जो दुनियाभर के तेल व्यापार का 'बादशाह' है। यहां की हलचल भारत में गाड़ी के पेट्रोल-डीजल का बिल तय करती है।
स्ट्रेट ऑफ होर्मुज फारस की खाड़ी को हिंद महासागर से जोड़ता है। इसके उत्तर में ईरान, दक्षिण में ओमान और संयुक्त अरब अमीरात (UAE) स्थित है। इसी रास्ते से होकर कुवैत, कतर, सऊदी अरब, इराक, बहरीन और यूएई का तेल और गैस इंटरनेटशनल मार्केट तक पहुंचाया जाता है। इसका अधिकांश हिस्सा चीन सहित एशियाई देशों को जाता है।
इसकी अहमियत की बात करें तो यह खाड़ी देशों के पास अपना तेल दुनिया तक पहुंचाने का एकलौता समुद्री विकल्प है। आंकड़ों के अनुसार, दुनियाभर में समुद्र के रास्ते कच्चे तेल के व्यापार का 20 से 25 प्रतिशत हिस्सा इसी रास्ते से होकर जाता है। यही वजह है कि इसे ग्लोबल एनर्जी ट्रेड का 'किंगमेकर' कहा जाता है।
जब भी खाड़ी देशों में, विशेषकर ईरान और पश्चिमी देशों (अमेरिका-इजरायल) के बीच तनाव होता है तो स्ट्रेट ऑफ होर्मुज एक भू-राजनीतिक हथियार में तब्दील हो जाता है। इस रूट पर ईरान की भौगोलिक पकड़ मजबूत है। ईरान के पास करीब 3000 शॉर्ट-रेंज मिसाइलें हैं जो तकरीबन 200 से 250 किमी तक मार करने में सक्षम है।
भारत अपनी जरूरत का लगभग 90 प्रतिशत कच्चा तेल आयात करता है, जिसमें से करीब 50 फीसदी तेल होर्मुज स्ट्रेट से होकर भारत के तटों तक पहुंचता है। ऐसे में इस रास्ते की रुकावट भारत के लिए खतरनाक हो सकती है। भारत को अंतरराष्ट्रीय बाजार में महंगे दामों पर तेल खरीदना पड़ सकता है। लेकिन, भारत के पास आपातकालीन स्थिति से निपटने के लिए सामरिक पेट्रोलियम भंडार (SPR) मौजूद हैं। इसके अलावा भारत 40 से अधिक देशों (रूस-अमेरिका आदि) से तेल खरीद करता है। लेकिन खाड़ी देशों से तेल कम समय में भारत पहुंचता है, जबकि अटलांटिक क्षेत्र या रूस से आने में 25 से 45 दिन का समय लग जाता है। ऐसे में होर्मुज के रास्ते में पैदा हुई यह अड़चन सीधे तौर पर भारत का आयात बिल बढ़ा सकती है।