नेपाल के इन पहाड़ी गांवों में कुछ दिन पहले तक शांति थी, आज इनमें कीचड़ और मलबा भरा है। लोग उनमें ऐसे सामान ढूंढ़ रहे हैं जो उनके काम के हों। अचानक आई भयानक बाढ़ से हुई तबाही का मंजर पूरे इलाके में दिख रहा है। देवीघाट में नुकसान का अंदाजा लगाना भी मुश्किल है।
घर और दुकानें कीचड़ और मलबे की मोटी परत के नीचे दब गई हैं, लोग एक ओर मलबे में अपने सामान तलाश रहे हैं, दूसरी ओर उन्हें लापता परिजनों की खबर का इंतजार है। लोगों की मदद के लिए बुलडोजर और एक्सकेवेटर लाए गए हैं, ताकि मलबा हटाया सकें, उनके नीचे दबे सामानों का थाह लग सके और टूटे-फूटे घरों से बचे-खुचे सामान निकाले जा सकें।
डरावनी बाढ़ के पलों को याद कर लोग अब भी सिहर उठते हैं। उन्होंने बताया कि उनके पास जान बचाने के लिए कुछ ही मिनट थे। किसी तरह उनकी जान तो बच गई, लेकिन उनके साजो-सामान बह गए। पड़ोस के गलछी के हालात भी उतने ही भयावह हैं। घर कीचड़ में दबे हुए हैं। दीवारें टूट गई हैं और इलाके के बड़े हिस्से पत्थर, गाद और मलबे से ढके हुए हैं।
बचे हुए लोगों का कहना है कि बाढ़ के पानी का बहाव इतना तेज था कि नदी के किनारों से दूर बने घर भी इसकी चपेट में आ गए। घरों की तबाही और मलबे के ढेर जमा होने के कारण, यहां के लोग अपनी जिंदगी फिर से पटरी पर लाने के लिए वित्तीय मदद की गुहार लगा रहे हैं। राहत कार्य चल रहे हैं, प्रभावितों को खाना, पीने का पानी और दूसरे जरूरी सामान बांटे जा रहे हैं। साथ ही अधिकारी नुकसान का भी जायजा ले रहे हैं।
सरकारी अधिकारी बाढ़ प्रभावित इलाकों का दौरा कर रहे हैं, ताकि नुकसान का आकलन किया जा सके और बचाव और राहत कार्यों की निगरानी की जा सके। सरकार का कहना है कि राहत और बहाली के काम अलग-अलग चरणों में किए जा रहे हैं। एक और फौरी मदद की जा रही है, दूसरी ओर पुनर्वास से लेकर लंबे समय तक चलने वाले पुनर्निर्माण को भी प्राथमिकता दी जा रही है।
नेपाल-तिब्बत सीमा के पास बुधवार को ग्लेशियर ढहने से भारी मात्रा में बर्फ और चट्टानों का मलबा नीचे की ओर बहने लगा। इससे पानी, कीचड़ और मलबे का सैलाब आ गया और मध्य नेपाल के कई कस्बों और गांवों में भारी तबाही मची। बाढ़ ने बुनियादी ढांचे को भारी नुकसान पहुंचाया और पनबिजली स्टेशनों को भी बहा दिया। इससे कई जिलों में तबाही का मंजर छा गया।
ताजा खबर मिलने तक आठ जिलों में साढ़े छह सौ से ज्यादा लोगों की मौत हुई है। करीब ढाई हजार लोग अब भी लापता हैं। हजारों सुरक्षाकर्मियों के साथ, बचावकर्मी बचे हुए लोगों को राहत पहुंचाने और लापता लोगों को खोजने में तेजी से जुटे हैं। रिकवरी और पुनर्निर्माण का काम भी तेजी पकड़ रहा है।