Breaking News

काले कपड़ों में संसद पहुंच रहे कांग्रेस सांसद, पेपर लीक मुद्दे पर सरकार को घेरने की पूरी तैयारी     |   जंतर-मंतर पर प्रदर्शनकारियों पर पुलिस कार्रवाई के खिलाफ तत्काल सुनवाई से सुप्रीम कोर्ट का इनकार     |   जंतर-मंतर पर CJP के प्रोटेस्ट के बीच दिल्ली मेट्रो के 16 स्टेशन बंद     |   राज्यसभा में जोरदार हंगामा, धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे पर अड़ी कांग्रेस     |   दिल्ली में CJP प्रदर्शन को लेकर अब तक कुल 10 FIR दर्ज     |  

भारत के 'वन-चाइना पॉलिसी' पर स्पष्टीकरण से चीन हैरान, ताइवान मुद्दे पर जताई आपत्ति

New Delhi: चीन ने गुरुवार को भारत द्वारा दिए गए उस स्पष्टीकरण पर हैरानी जताई है जिसमें भारत ने कहा था कि ताइवान पर उसकी नीति में कोई बदलाव नहीं हुआ है। यह बयान विदेश मंत्री एस. जयशंकर और चीन के विदेश मंत्री वांग यी के बीच हुई बातचीत के बाद आया था।

चीन के विदेश मंत्रालय की प्रवक्ता माओ निंग ने प्रेस ब्रीफिंग में कहा, "हमें भारत के स्पष्टीकरण से आश्चर्य हुआ है। लगता है कुछ लोग भारत में ताइवान के मुद्दे पर चीन की संप्रभुता को कमजोर करने और दोनों देशों के रिश्तों को प्रभावित करने की कोशिश कर रहे हैं। चीन इस पर गंभीर चिंता व्यक्त करता है और इसका कड़ा विरोध करता है।"

चीन ने दावा किया कि बातचीत के दौरान जयशंकर ने कहा था कि ताइवान, चीन का हिस्सा है। लेकिन भारत ने इस बयान को गलत बताया और कहा कि ताइवान पर भारत की नीति में कोई बदलाव नहीं हुआ है।

भारतीय विदेश मंत्रालय ने अपने बयान में कहा, "चीनी पक्ष ने ताइवान का मुद्दा उठाया था, जिस पर भारत ने स्पष्ट किया कि हमारी नीति में कोई बदलाव नहीं है। भारत और ताइवान के बीच आर्थिक, तकनीकी और सांस्कृतिक संबंध हैं और यह आगे भी जारी रहेंगे।" विदेश मंत्रालय ने यह भी कहा कि चीन खुद भी ताइवान के साथ इन ही क्षेत्रों में सहयोग करता है।

प्रवक्ता माओ निंग ने कहा, "दुनिया में एक ही चीन है और ताइवान चीन का अभिन्न हिस्सा है। यह अंतरराष्ट्रीय समुदाय की सहमति है, जिसमें भारत भी शामिल है।" उन्होंने भारत से अपील की कि वह "वन-चाइना पॉलिसी" का ईमानदारी से पालन करे और संवेदनशील मुद्दों को सावधानी से संभाले।

गौरतलब है कि भारत ने 2011 के बाद से किसी भी द्विपक्षीय दस्तावेज में "वन-चाइना पॉलिसी" का जिक्र नहीं किया है। हालांकि भारत और ताइवान के बीच कोई औपचारिक राजनयिक संबंध नहीं हैं, लेकिन दोनों देशों के बीच व्यापार और तकनीकी सहयोग लगातार बढ़ रहा है। ताइवान दुनिया के लगभग 70 फीसदी सेमीकंडक्टर का उत्पादन करता है, जिनका इस्तेमाल मोबाइल फोन, कारों, डाटा सेंटर, लड़ाकू विमान और एआई तकनीकों में होता है।