उत्तर प्रदेश इंटरनेशनल ट्रेड शो (यूपीआईटीएस)-2026 में प्रदेश की आधुनिक सिंचाई व्यवस्था और जल प्रबंधन की तकनीकों को प्रदर्शित किया जाएगा। ग्रेटर नोएडा के इंडिया एक्सपो सेंटर एंड मार्ट में होने वाले ट्रेड शो के हॉल नंबर-6 में सिंचाई एवं जल संसाधन विभाग की ओर से पवेलियन लगाया जाएगा। यहां लाइव इंजीनियरिंग मॉडल के जरिए सिंचाई परियोजनाओं, बाढ़ नियंत्रण और जल प्रबंधन में इस्तेमाल हो रही आधुनिक तकनीकों की जानकारी दी जाएगी।
19.48 लाख हेक्टेयर सिंचाई क्षेत्र का विस्तार
विभाग के अनुसार, पिछले साढ़े नौ वर्षों में प्रदेश में 17.29 लाख हेक्टेयर नया सिंचाई क्षेत्र विकसित किया गया, जबकि 2.19 लाख हेक्टेयर सिंचाई क्षेत्र को दोबारा विकसित किया गया। इस तरह कुल 19.48 लाख हेक्टेयर सिंचाई क्षेत्र का विस्तार या पुनर्स्थापन हुआ है। इससे करीब 44.81 लाख किसान परिवारों को लाभ मिलने का दावा किया गया है।
पवेलियन में बाणसागर नहर परियोजना, पहाड़ी बांध परियोजना, अर्जुन सहायक नहर परियोजना, सरयू नहर राष्ट्रीय परियोजना समेत कई प्रमुख परियोजनाओं के लाइव मॉडल दिखाए जाएंगे। नहर नेटवर्क, लिफ्ट कैनाल, बांध और बैराज की कार्यप्रणाली को ऑडियो-विजुअल माध्यम से भी समझाया जाएगा।
SCADA और AI से स्मार्ट जल प्रबंधन
पवेलियन में स्मार्ट सिंचाई प्रणाली प्रमुख आकर्षण रहेगी। सिंचाई जल के वितरण, नहरों के संचालन और सरकारी नलकूपों की निगरानी में SCADA, AI और IoT तकनीक का इस्तेमाल किया जा रहा है। विभाग के अनुसार, 15 प्रमुख बांधों और बैराजों पर SCADA सिस्टम लगाए गए हैं। इनके जरिए कंट्रोल रूम से गेटों का इलेक्ट्रॉनिक संचालन किया जा सकता है और बांध-बैराज से जुड़ा रियल-टाइम डेटा ऑनलाइन प्राप्त किया जा सकता है। केंद्रीयकृत नियंत्रण प्रणाली के जरिए दूरदराज के बैराज, सरकारी नलकूप और पंप नहरों की निगरानी भी की जा रही है।
बाढ़ नियंत्रण के लिए आधुनिक तकनीक
प्रदर्शनी में बाढ़ नियंत्रण के लिए इस्तेमाल की जा रही तकनीकों की भी जानकारी दी जाएगी। इनमें कंक्रीट मैट्रेस टेक्नोलॉजी, सिल्ट वेन, बॉटम पैनल्स, शीट पाइल, परमेबल स्ट्रक्चर और टेट्रापॉड जैसी तकनीकें शामिल हैं। विभाग के अनुसार, प्रदेश की गंगा, यमुना, सोलानी, रामगंगा, सुवाओन, खोकरी, मंदाकिनी, केन, बेतवा, बूढ़ी गंगा और टेढ़ी नदियों पर फ्लड प्लेन जोनिंग का काम पूरा किया जा चुका है। इसके साथ ही 58 स्थानों पर ड्रेजिंग का काम किया गया है। गंगा, घाघरा, शारदा और रामगंगा जैसी नदियों में ड्रेजिंग के जरिए नदी के प्रवाह को बेहतर बनाने के प्रयास किए गए हैं।
'पर ड्रॉप मोर क्रॉप' पर जोर
कम पानी वाले क्षेत्रों में सिंचाई के लिए प्रेशर इरिगेशन और स्प्रिंकलर आधारित परियोजनाओं को बढ़ावा दिया जा रहा है। हमीरपुर की महुआगांव-चिल्ली, महोबा की कुलपहाड़ और ललितपुर की शहजाद बांध स्प्रिंकलर सिंचाई परियोजनाओं को भी प्रदर्शनी में दिखाया जाएगा।
सिद्धार्थनगर, महाराजगंज और गोरखपुर में सात प्रेशर सिंचाई प्रणालियां विकसित की गई हैं। इनके जरिए करीब 4,000 हेक्टेयर सिंचाई क्षमता विकसित होने और लगभग 15 हजार किसान परिवारों को लाभ मिलने की जानकारी दी गई है।
सौर ऊर्जा से सिंचाई को बढ़ावा
उत्तर प्रदेश सौर ऊर्जा नीति-2022 के तहत सिंचाई विभाग नलकूपों, लिफ्ट नहरों, स्प्रिंकलर और प्रेशर सिंचाई परियोजनाओं में सौर ऊर्जा के इस्तेमाल की दिशा में भी काम कर रहा है। नहरों के वाटरवेज पर सोलर पावर प्लांट लगाने की संभावनाओं को भी यूपीआईटीएस में प्रदर्शित किया जाएगा।
विभाग के अनुसार, नहरों की सिल्ट सफाई का दायरा 27,551 किलोमीटर से बढ़कर 55,320 किलोमीटर हो गया है। खरीफ में पानी की पहुंच 9,517 टेल से बढ़कर 10,422 टेल और रबी में 9,376 से बढ़कर 10,932 टेल तक हुई है। इसी अवधि में कुल सिंचित क्षेत्र 82.54 लाख हेक्टेयर से बढ़कर 106.82 लाख हेक्टेयर हुआ है।