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राजीव गांधी की पुण्यतिथि पर सोनिया, राहुल, प्रियंका गांधी और खरगे ने दी श्रद्धांजलि

पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी की 35वीं पुण्यतिथि पर गुरुवार को कांग्रेस संसदीय दल की अध्यक्ष सोनिया गांधी, कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे, लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी और कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा ने दिल्ली स्थित वीर भूमि पहुंचकर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की। इस दौरान प्रियंका गांधी के बेटे रेहान वाड्रा और बेटी मिराया वाड्रा भी मौजूद रहे।

इससे पहले कांग्रेस के वरिष्ठ नेता अशोक गहलोत, पी. चिदंबरम, भूपेंद्र सिंह हुड्डा और मुकुल वासनिक समेत कई नेताओं ने भी वीर भूमि पहुंचकर पूर्व प्रधानमंत्री को श्रद्धांजलि दी। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर राजीव गांधी को “भारत का असाधारण सपूत” बताते हुए उनके योगदान को याद किया। उन्होंने कहा कि राजीव गांधी ने देश को 21वीं सदी की ओर ले जाने की मजबूत नींव रखी।

खरगे ने लिखा, “भारत एक प्राचीन देश है लेकिन एक युवा राष्ट्र भी है… मैं ऐसे भारत का सपना देखता हूं जो मजबूत, स्वतंत्र, आत्मनिर्भर और मानवता की सेवा में विश्व के अग्रणी देशों में शामिल हो। राजीव गांधी ने दूरदृष्टि, साहस और भारत के भविष्य में गहरे विश्वास के साथ करोड़ों लोगों में उम्मीद और आकांक्षा जगाई।”

उन्होंने आगे कहा कि राजीव गांधी के कार्यकाल में 18 वर्ष की उम्र में मतदान का अधिकार, पंचायती राज संस्थाओं को सशक्त बनाना, दूरसंचार और सूचना प्रौद्योगिकी क्रांति, कंप्यूटरीकरण, महत्वपूर्ण शांति समझौते, सार्वभौमिक टीकाकरण कार्यक्रम और समावेशी शिक्षा नीति जैसे ऐतिहासिक कदम उठाए गए।

वहीं, वीर भूमि पर कांग्रेस नेता भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने राजीव गांधी को भारतीय युवाओं के लिए उम्मीद का प्रतीक बताया। उन्होंने कहा, “राजीव गांधी दोबारा प्रधानमंत्री बनने वाले थे, लेकिन उनकी हत्या कर दी गई। उन्होंने भारत के लिए हर संभव काम किया। देश के युवा उन्हें आदर्श मानते थे। गांधी परिवार ने हमेशा देश के लिए बलिदान दिया है, न कि किसी निजी स्वार्थ के लिए।”

कांग्रेस नेता अशोक गहलोत ने भी राजीव गांधी के विजन को याद करते हुए कहा कि उन्होंने उस दौर में 21वीं सदी की बात की थी, जब देश तकनीकी बदलावों की शुरुआत कर रहा था। गहलोत ने कहा, “राजीव गांधी का विज्ञान, तकनीक और युवाओं को आगे बढ़ाने पर विशेष जोर था। उन्होंने 18 साल की उम्र में मतदान का अधिकार देने का फैसला लिया, जिसका पार्टी के भीतर भी विरोध हुआ था। उनका मानना था कि युवा ही भविष्य के भारत के निर्माता हैं।”

राजीव गांधी ने 1984 में अपनी मां और तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की हत्या के बाद कांग्रेस की कमान संभाली थी। अक्टूबर 1984 में 40 वर्ष की आयु में वह भारत के सबसे युवा प्रधानमंत्री बने। उन्होंने 2 दिसंबर 1989 तक प्रधानमंत्री पद संभाला। 20 अगस्त 1944 को जन्मे राजीव गांधी की 21 मई 1991 को तमिलनाडु के श्रीपेरंबदूर में चुनावी रैली के दौरान लिट्टे (LTTE) के आत्मघाती हमलावर द्वारा हत्या कर दी गई थी।