प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी गुरुवार को अपने पांच देशों के दौरे को पूरा कर दिल्ली लौट आए। इस दौरे में उन्होंने संयुक्त अरब अमीरात (UAE), नीदरलैंड, स्वीडन, नॉर्वे और इटली की यात्रा की। प्रधानमंत्री मोदी का अंतिम पड़ाव इटली था, जहां उन्होंने इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी के साथ विस्तृत बातचीत की और दोनों देशों के संबंधों को “स्पेशल स्ट्रैटेजिक पार्टनरशिप” तक पहुंचाने का फैसला लिया।
इटली दौरे के बाद प्रधानमंत्री मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर कहा कि उनकी और मेलोनी की बातचीत कई महत्वपूर्ण क्षेत्रों पर केंद्रित रही और इससे भारत-इटली सहयोग को नई गति मिलेगी। उन्होंने कहा, “इस यात्रा का एक महत्वपूर्ण परिणाम भारत-इटली संबंधों को स्पेशल स्ट्रैटेजिक पार्टनरशिप तक ले जाने का निर्णय रहा, जो आने वाले वर्षों में हमारे सहयोग को नई ऊर्जा देगा।”
इटली दौरे के दौरान पीएम मोदी और जॉर्जिया मेलोनी के बीच का “Melody moment” भी काफी चर्चा में रहा। प्रधानमंत्री मोदी ने मेलोनी को ‘Melody’ टॉफियों का पैकेट भेंट किया, जिसकी तस्वीरें और वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गए। विदेश मंत्रालय के अनुसार, दोनों नेताओं ने द्विपक्षीय संबंधों के साथ-साथ पश्चिम एशिया की स्थिति और रूस-यूक्रेन संघर्ष जैसे क्षेत्रीय और वैश्विक मुद्दों पर भी चर्चा की।
विदेश मंत्रालय में सचिव (पश्चिम) सिबी जॉर्ज ने बताया कि भारत और इटली ने व्यापार और निवेश, रक्षा और सुरक्षा, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी, अनुसंधान और नवाचार, ऊर्जा, अंतरिक्ष, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, शिक्षा, संस्कृति और लोगों के बीच संपर्क जैसे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर सहमति जताई है। इस दौरान रक्षा, कनेक्टिविटी, कृषि, पारंपरिक चिकित्सा, शिक्षा, गतिशीलता और महत्वपूर्ण प्रौद्योगिकी क्षेत्रों में कई समझौता ज्ञापनों (MoUs) पर भी हस्ताक्षर किए गए।
सिबी जॉर्ज ने कहा कि भारत और इटली ने 2029 तक द्विपक्षीय व्यापार को 20 अरब यूरो तक पहुंचाने का लक्ष्य तय किया है। इसमें इस वर्ष भारत-यूरोपीय संघ मुक्त व्यापार समझौते (FTA) वार्ता के सफल निष्कर्ष से भी मदद मिलेगी। इटली से पहले प्रधानमंत्री मोदी ने UAE, नीदरलैंड, स्वीडन और नॉर्वे का दौरा किया था।
दिल्ली लौटने के बाद प्रधानमंत्री मोदी गुरुवार शाम 5 बजे राष्ट्रीय राजधानी स्थित सेवा तीर्थ में केंद्रीय मंत्रिपरिषद की बैठक की अध्यक्षता करेंगे। यह बैठक सरकार के कामकाज की मध्यावधि समीक्षा के लिहाज से महत्वपूर्ण मानी जा रही है। साथ ही पश्चिम एशिया संघर्ष और होर्मुज जलडमरूमध्य में जारी तनाव के कारण बढ़ती वैश्विक ईंधन कीमतों और ऊर्जा सुरक्षा के मुद्दों पर भी चर्चा होने की संभावना है।