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नागपुर में ध्वनि प्रदूषण के खिलाफ साइलेंट मार्च, तेज आवाज और लाउडस्पीकर पर जताई चिंता

महाराष्ट्र के नागपुर में बढ़ते ध्वनि प्रदूषण और तेज आवाज वाले म्यूजिक सिस्टम के खिलाफ रविवार सुबह लोगों ने साइलेंट प्रोटेस्ट मार्च निकाला। प्रदर्शन का उद्देश्य तेज आवाज से होने वाले स्वास्थ्य संबंधी नुकसान को लेकर लोगों और प्रशासन का ध्यान आकर्षित करना था। प्रदर्शन के आयोजक संदीप जोशी ने कहा कि अत्यधिक शोर से बुजुर्गों, मरीजों और छोटे बच्चों के स्वास्थ्य पर गंभीर असर पड़ रहा है। उन्होंने दावा किया कि तेज आवाज से घरों में रहने वाले लोगों के कान के पर्दों को नुकसान पहुंच रहा है।

उन्होंने कहा कि इस अभियान को समाज के अलग-अलग वर्गों का समर्थन मिल रहा है। इनमें बुजुर्गों के साथ गर्भवती महिलाएं और छोटे बच्चों वाले परिवार भी शामिल हैं। जोशी ने स्पष्ट किया कि यह आंदोलन किसी धर्म, त्योहार या राजनीतिक दल के खिलाफ नहीं है, बल्कि इसका मुद्दा स्वास्थ्य और ध्वनि प्रदूषण है।

संदीप जोशी ने सार्वजनिक समारोहों में तेज आवाज के साथ इस्तेमाल होने वाली लेजर लाइट्स को लेकर भी चिंता जताई। उन्होंने कहा कि तेज आवाज से जहां बुजुर्गों, मरीजों और बच्चों के कान प्रभावित हो रहे हैं, वहीं लेजर बीम से आंखों की रेटिना को नुकसान पहुंचने का खतरा है। उन्होंने कहा कि आंदोलन किसी खास धर्म या त्योहार को निशाना नहीं बना रहा है और ध्वनि प्रदूषण के खिलाफ अभियान जारी रहेगा। उन्होंने यह भी कहा कि हालिया अदालत के आदेश के बाद ऐसी पाबंदियां आगे भी लागू रहेंगी।

यह प्रदर्शन नागपुर में सदियों पुराने मरबत उत्सव के एक दिन बाद हुआ। भाद्रपद महीने में हर साल आयोजित होने वाला यह प्रमुख सांस्कृतिक उत्सव बड़े जुलूसों के लिए जाना जाता है। इसमें हजारों लोग हिस्सा लेते हैं और बांस, कागज व कपड़े से बनी विशाल प्रतिमाओं को जुलूस में शामिल किया जाता है। मरबत प्रतिमाएं बुराई, सामाजिक कुरीतियों और समाज से जुड़े मुद्दों का प्रतीक मानी जाती हैं। इनके अलावा छोटी प्रतिमाएं ‘बडग्या’ भी जुलूस का हिस्सा होती हैं। जुलूस के दौरान शहर के अलग-अलग इलाकों से लोग संगीत, नारों और पारंपरिक जयघोष के साथ आगे बढ़ते हैं। उत्सव के अंत में इन प्रतिमाओं का दहन किया जाता है, जो बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक माना जाता है।