देहरादून के प्रेमनगर थाना क्षेत्र में बुधवार देर रात पुलिस और बदमाशों के बीच मुठभेड़ हो गई, जिसमें एक आरोपी मारा गया। यह मुठभेड़ ₹2 लाख की लूट और फायरिंग की घटना के बाद हुई। पुलिस के अनुसार, लूट के बाद आरोपी फरार हो रहे थे, तभी पुलिस ने उनका पीछा किया। इस दौरान बदमाशों ने फायरिंग की, जिसमें एक पुलिस कर्मी घायल हो गया। जवाबी कार्रवाई में पुलिस ने भी गोली चलाई, जिसमें एक बदमाश मौके पर ही मारा गया।
यह घटना 2009 के चर्चित रणबीर एनकाउंटर की याद दिलाती है, जिसने उत्तराखंड में बड़ा विवाद खड़ा कर दिया था। उस समय पुलिस ने मुठभेड़ में एक अपराधी के मारे जाने का दावा किया था, लेकिन बाद में यह फर्जी एनकाउंटर साबित हुआ। इस मामले में गाजियाबाद निवासी और एमबीए छात्र रणबीर सिंह की मौत हुई थी, जो नौकरी के सिलसिले में देहरादून गया था।
6 फरवरी 2018 को दिल्ली हाई कोर्ट ने इस मामले में सात पुलिसकर्मियों को दोषी ठहराया था, जबकि 11 अन्य को बरी कर दिया गया था। दोषी ठहराए गए पुलिसकर्मियों में तत्कालीन इंस्पेक्टर संतोष जायसवाल और सब-इंस्पेक्टर गोपाल दत्त भट्ट, राजेश बिष्ट, नीरज कुमार, नितिन चौहान, चंद्र मोहन और कॉन्स्टेबल अजीत सिंह शामिल थे। वहीं 11 अन्य पुलिसकर्मियों को अदालत ने बरी कर दिया था।