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चढ़ावा चोरी जांच के बीच राम मंदिर की व्यवस्था में बड़ा बदलाव, दो अधिकारियों पर कार्रवाई

श्रीराम जन्मभूमि मंदिर में चढ़ावे और दान की कथित चोरी की जांच के बीच मंदिर प्रशासन और व्यवस्था में बड़ा बदलाव किया गया है। श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने प्रबंधन व्यवस्था को और सख्त एवं पारदर्शी बनाने के लिए दो अधिकारियों को मंदिर की जिम्मेदारियों से हटा दिया है। ट्रस्ट से जुड़े अनिल मिश्रा के करीबी माने जाने वाले केडी तिवारी उर्फ ‘बड़े बाबू’ और बजरंग पाठक को मंदिर की मौजूदा व्यवस्था से हटाकर तीर्थ क्षेत्रपुरम भेज दिया गया है। दोनों के राम मंदिर परिसर में प्रवेश पर भी रोक लगा दी गई है।

केडी तिवारी उर्फ ‘बड़े बाबू’ मंदिर में आभूषणों के हिसाब-किताब से जुड़ी जिम्मेदारी संभालते थे। वहीं बजरंग पाठक के पास VIP दर्शनार्थियों के प्रसाद से जुड़ी व्यवस्था की जिम्मेदारी थी। दोनों को अब मंदिर की व्यवस्था से अलग कर दिया गया है। यह कार्रवाई राम मंदिर में चढ़ावे से जुड़े मामले की जांच और विशेष जांच दल (SIT) की रिपोर्ट सामने आने के बीच हुई है। मंदिर प्रशासन की ओर से व्यवस्था में पारदर्शिता और निगरानी बढ़ाने के लिए पहले भी कई कदम उठाए गए हैं।

राम मंदिर में चढ़ावे की कथित चोरी के मामले में उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा गठित SIT ने अपनी अंतिम रिपोर्ट श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट को सौंप दी है। इस मामले में जांच की निगरानी सुप्रीम कोर्ट द्वारा भी की जा रही है। जांच के बाद मंदिर में दान और चढ़ावे की गिनती की प्रक्रिया को भी और सख्त किया गया है। दानपात्रों और चढ़ावे की गिनती में डिजिटल निगरानी बढ़ाने के साथ पूरी प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी बनाने पर जोर दिया जा रहा है।

इससे पहले मंदिर व्यवस्था में पारदर्शिता बढ़ाने के लिए कई वरिष्ठ पदाधिकारियों के VIP पास जारी करने वाली डिजिटल ID को भी निलंबित किया गया था। अब दो अधिकारियों को मंदिर व्यवस्था से हटाए जाने और परिसर में प्रवेश पर रोक के बाद प्रशासनिक बदलाव को लेकर चर्चा तेज हो गई है। मंदिर प्रशासन की ओर से किए जा रहे इन बदलावों का उद्देश्य व्यवस्था को अधिक पारदर्शी, जवाबदेह और सुरक्षित बनाना बताया जा रहा है।