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भारत में शीघ्र ही आरंभ होगी अफ़्रीकी सफ़ारी, NBCC ने समझौते पर किए हस्ताक्षर

एनबीसीसी ने गोरेवाड़ा चिड़ियाघर, नागपुर में प्रतिष्ठित अफ्रीकी सफारी के लिए समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए जिसकी अनुमानित लागत 355 करोड़ रुपये है। एनबीसीसी (इंडिया) लिमिटेड ने महाराष्ट्र सरकार के उपक्रम एफडीसीएम गोरेवाड़ा ज़ू लिमिटेड (एफजीजेडएल) के साथ समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर करके वन्यजीव संरक्षण और पारिस्थितिक-पर्यटन अवसंरचना में एक रूपांतरणकारी उपलब्धि प्राप्त की है। यह समझौता ज्ञापन बालासाहेब ठाकरे गोरेवाड़ा अंतर्राष्ट्रीय प्राणी उद्यान, नागपुर में अफ्रीकी सफारी और एट्रेंस प्लाजा के विकास से संबंधित है।

महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फड़नवीस की उपस्थिति में चंद्रशेखरन बाला, सीईओ, एफजीजेडएल और प्रवीण तुकाराम डोईफोडे, कार्यपालक निदेशक, एनबीसीसी ने समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए। मुख्यमंत्री ने इस परियोजना को संरक्षण आधारित पर्यटन और अवसंरचना की उत्कृष्टता के प्रति महाराष्ट्र की प्रतिबद्धता के प्रतीक के रूप में परिकल्पित किया है। इस अवसर पर गणेश नाइक, महाराष्ट्र के माननीय वन मंत्री, नरेश जुरमुरे, प्रबंध निदेशक, एफजीजेडएल, के.पी. महादेवास्वामी, अध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशक, एनबीसीसी, विकास खड़गे, महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री के अपर मुख्य सचिव, मिलिंद म्हैसकर, अपर मुख्य सचिव, विवेक होशिंग, उप सचिव, वन, महाराष्ट्र सरकार और एनबीसीसी तथा एफडीसीएम गोरेवाड़ा चिड़ियाघर लिमिटेड के अधिकारीगण भी उपस्थित रहे।

कार्यान्वयन एजेंसी के रूप में, एनबीसीसी (इंडिया) लिमिटेड अफ्रीकी सवाना सफारी, कोप-जे वॉक ट्रेल की आयोजना, डिज़ाइन, निष्पादन और समग्र विकास के लिए जिम्मेदार होगा जो मध्य अफ्रीका के अनूठे ग्रेनाइट संरचनाओं और एट्रेंस प्लाजा की प्रतिकृति होगा। 355 करोड़ रुपये की अनुमानित लागत वाली इस परियोजना का क्रियान्वयन लगभग 63 हेक्टेयर क्षेत्र में किया जाएगा, यह परियोजना विश्व-स्तरीय वन्यजीव अनुभव प्रदान करेगी। इसमें अफ्रीकी चिड़ियाघर, सफारी प्लाजा, पशु अस्पताल और संगरोध केंद्र, थीमिंग कार्य, लैंडस्केपिंग और वृक्षारोपण तथा एसटीपी सहित सीवरेज प्रणाली का विकास शामिल होगा। इसके दायरे में जलापूर्ति, सेवा क्षेत्र विकास, फर्निशिंग, इंटीरियर और आगंतुक सुविधाएं आदि जैसे अन्य संबद्ध कार्य भी शामिल हैं। आगंतुक-अनुकूल एट्रेंस प्लाजा में फूड कोर्ट, दर्शनीय क्षेत्र, टिकट काउंटर, निर्वचन केंद्र और 6 हेक्टेयर का पार्किंग क्षेत्र शामिल होगा, जिसमें 1,900 से अधिक वाहन पार्क हो सकेंगे। एनबीसीसी वैश्विक प्राणिविज्ञान मानकों के अनुरूप पर्यावरण के प्रति संवेदनशील और संधारणीय डिज़ाइन तत्वों को भी शामिल करेगा।

परियोजना के अफ्रीकी सफारी घटक अफ्रीकी पारिस्थितिकी तंत्र की प्रामाणिक प्रतिकृति होगी जो कि भारत में अपनी तरह की पहली और अनूठी पहल होगी। इस चिड़ियाघर में 30 से अधिक अफ्रीकी पशु-पक्षियों की प्रतिष्ठित प्रजातियां रखी जाएंगी, जिनमें जिराफ, बुर्चेल ज़ेबरा, इंपाला, जेम्सबॉक, कुडू, ब्लू वाइल्डबीस्ट, कॉमन एलैंड, दरियाई घोड़ा, शुतुरमुर्ग, अफ्रीकी शेर, सफेद गैंडा, चीता, चित्तीदार लकड़बग्घा, रेड रिवर हॉग, चिम्पांजी, हमाद्रियास बबून, पाटस बंदर, रिंग-टेल्ड लेमुर आदि शामिल हैं।

यह अनूठा अभिन्यास ड्राइव-थ्रू सफारी और पैदल मार्ग प्रदान करेगा, जिससे पशु कल्याण और सुरक्षा के उच्चतम मानकों को बनाए रखते हुए आगंतुकों के लिए निकटता और अविस्मरणीय अनुभव सुनिश्चित किया जाएगा।

यह अफ्रीकी सफारी एक पर्यटक आकर्षण से कहीं अधिक एक स्टेटमेंट है। यह एनबीसीसी के उच्च-प्रभाव वाली अवसंरचना प्रदान करने के दृष्टिकोण के अनुरूप है जो स्थानीय अर्थव्यवस्थाओं को सशक्त बनाता है, संरक्षण जागरूकता को बढ़ावा देता है और स्वदेशी विशेषज्ञता के साथ वैश्विक मानकों की प्रतिकृति करने की भारत की क्षमता को प्रदर्शित करता है। अफ्रीका की झलक भारत में लाकर एनबीसीसी न केवल अवसंरचना निर्माण के माध्यम से बल्कि विरासत तैयार करके राष्ट्र निर्माण में अग्रणी स्थान रखने की अपनी स्थिति की पुष्टि कर रहा है।