दिल्ली हाईकोर्ट ने दिल्ली विश्वविद्यालय छात्र संघ (DUSU) चुनाव और विश्वविद्यालय से संबद्ध सभी कॉलेजों के छात्रसंघ चुनावों में महिला छात्रों के लिए 50 प्रतिशत आरक्षण की मांग वाली जनहित याचिका (PIL) पर बुधवार को नोटिस जारी किया। मुख्य न्यायाधीश-नामित जस्टिस देवेंद्र कुमार उपाध्याय और जस्टिस तेजस करिया की डिवीजन बेंच ने इस मामले में नोटिस जारी किया।
यह याचिका दिल्ली विश्वविद्यालय की पूर्व छात्रा और अधिवक्ता शबाना हुसैन ने दायर की है। याचिका में दिल्ली विश्वविद्यालय को DUSU और कॉलेज छात्रसंघ चुनावों में महिलाओं के लिए रोटेशन के आधार पर 50 प्रतिशत आरक्षण लागू करने का निर्देश देने की मांग की गई है। याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता आशु बिधूड़ी पेश हुए।
याचिका में कहा गया है कि दिल्ली विश्वविद्यालय में कुल छात्रों में करीब 53 प्रतिशत महिलाएं हैं, लेकिन निर्वाचित छात्रसंघों में उनका प्रतिनिधित्व काफी कम रहा है। याचिका के अनुसार, 2013 से 2024 के बीच DUSU के 32 निर्वाचित प्रतिनिधियों में केवल 8 महिलाएं थीं। वहीं, 2009 के बाद से DUSU अध्यक्ष पद पर कोई महिला नहीं चुनी गई है।
याचिका में यह भी बताया गया है कि 1954 में DUSU चुनाव शुरू होने के बाद से अब तक 68 अध्यक्षों में केवल 10 महिलाएं रही हैं। याचिकाकर्ता का तर्क है कि यह स्थिति विश्वविद्यालय की छात्र चुनाव व्यवस्था में महिलाओं के लगातार कम प्रतिनिधित्व को दर्शाती है। PIL में आरोप लगाया गया है कि छात्रसंघ चुनावों में कथित तौर पर पैसे और बाहुबल का इस्तेमाल, हिंसा, डराने-धमकाने, लैंगिक टिप्पणियां, साइबर बुलिंग और सोशल मीडिया ट्रोलिंग जैसी परिस्थितियां महिला छात्रों को चुनाव लड़ने से हतोत्साहित करती हैं।
याचिका में कहा गया है कि निर्वाचित छात्रसंघों में महिलाओं की कम भागीदारी का असर छात्राओं से जुड़े मुद्दों के प्रतिनिधित्व पर भी पड़ता है। इनमें यौन उत्पीड़न, सुरक्षा, हॉस्टल सुविधाएं, कर्फ्यू का समय, सैनिटरी सुविधाएं और अन्य लैंगिक मुद्दे शामिल हैं। याचिका में यह भी बताया गया है कि शबाना हुसैन ने 2024 में भी इसी तरह की मांग को लेकर दिल्ली हाईकोर्ट का रुख किया था।
11 सितंबर 2024 को हाईकोर्ट ने दिल्ली विश्वविद्यालय के कुलपति को महिलाओं के लिए 50 प्रतिशत आरक्षण की मांग वाले उनके प्रतिनिधित्व पर फैसला लेने का निर्देश दिया था। कोर्ट ने यह फैसला अधिमानतः तीन सप्ताह के भीतर लेने को कहा था। हालांकि, मौजूदा याचिका में आरोप लगाया गया है कि पिछली अदालत की ओर से दिए गए निर्देश के बावजूद विश्वविद्यालय ने अभी तक इस मुद्दे पर कोई अंतिम फैसला नहीं लिया है और मामला अब भी विचाराधीन है।
याचिकाकर्ता ने दिल्ली विश्वविद्यालय की DUSU चुनाव सुधार समिति की सिफारिशों का भी हवाला दिया है। याचिका के अनुसार, समिति ने चुनाव प्रक्रिया में लैंगिक समानता बढ़ाने के लिए एक पदाधिकारी पद पर रोटेशन के आधार पर महिलाओं के लिए आरक्षण की सिफारिश की थी। PIL में अदालत से मांग की गई है कि DUSU चुनाव में 50 प्रतिशत सीटें महिला छात्रों के लिए रोटेशन के आधार पर आरक्षित करने का निर्देश दिया जाए। साथ ही, दिल्ली विश्वविद्यालय से संबद्ध सभी कॉलेजों के छात्रसंघ चुनावों में भी इसी तरह की व्यवस्था लागू करने की मांग की गई है। यह मामला 2026-27 शैक्षणिक सत्र के DUSU चुनावों से पहले आया है। DUSU चुनाव 18 सितंबर को होने हैं।