भारतीय शेयर बाजार के प्रमुख सूचकांक बुधवार को लगातार तीसरे कारोबारी सत्र में गिरावट के साथ बंद हुए। पश्चिम एशिया में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव और कच्चे तेल की कीमतों में तेजी के बीच सेंसेक्स 374 अंक से अधिक गिरा, जबकि निफ्टी 24,000 के मनोवैज्ञानिक स्तर से नीचे बंद हुआ।बीएसई सेंसेक्स 373.93 अंक यानी 0.49 प्रतिशत की गिरावट के साथ 76,570.35 पर बंद हुआ। वहीं, एनएसई निफ्टी 141.35 अंक यानी 0.59 प्रतिशत गिरकर 23,914.45 पर बंद हुआ।
सेक्टोरल इंडेक्स में निफ्टी ऑटो सबसे कमजोर रहा और इसमें 1 प्रतिशत से अधिक की गिरावट दर्ज की गई। इसके बाद आईटी सेक्टर में भी दबाव रहा। बाजार के सभी व्यापक सूचकांक (ब्रॉड-मार्केट इंडेक्स) भी गिरावट के साथ बंद हुए। बीएसई पर अदाणी पोर्ट्स, पावर ग्रिड, एनटीपीसी, टाइटन, आईटीसी, रिलायंस, ट्रेंट, बजाज फाइनेंस और एलएंडटी प्रमुख बढ़त वाले शेयरों में शामिल रहे। वहीं, इंफोसिस, एमएंडएम, टेक महिंद्रा, एसबीआई, आईसीआईसीआई बैंक, एक्सिस बैंक, Eternal, इंडिगो और टाटा स्टील प्रमुख गिरावट वाले शेयरों में रहे।
एनएसई पर कोल इंडिया, एनटीपीसी, अदाणी पोर्ट्स, पावर ग्रिड, TMPV, रिलायंस, आईटीसी, एलएंडटी, ओएनजीसी और टाइटन प्रमुख बढ़त वाले शेयरों में रहे। जबकि आयशर मोटर्स, इंफोसिस, सन फार्मा, Eternal, कोटक बैंक, ग्रासिम, एक्सिस बैंक, ट्रेंट, सिप्ला, हिंडाल्को, इंडिगो, हिंदुस्तान यूनिलीवर, एसबीआई लाइफ, BEL और एचसीएल टेक में गिरावट रही।
कमोडिटी बाजार में रिपोर्टिंग के समय ब्रेंट क्रूड करीब 94.87 डॉलर प्रति बैरल पर कारोबार कर रहा था, जबकि कच्चे तेल की कीमत करीब 90.37 डॉलर प्रति बैरल थी। मार्केट एनालिस्ट विपिन दीक्षित ने कहा कि बुधवार की गिरावट को सामान्य मुनाफावसूली के तौर पर नहीं देखा जा सकता। कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें भारत के लिए व्यापक आर्थिक जोखिम बन रही हैं।
उन्होंने कहा कि तेल की ऊंची कीमतों से रुपये, महंगाई और बॉन्ड यील्ड पर दबाव बढ़ सकता है। साथ ही, इससे आगे मौद्रिक नीति में ढील की संभावना भी कम हो सकती है। उन्होंने कहा कि विभिन्न सेक्टरों में हुई बिकवाली से पता चलता है कि बाजार में जोखिम से बचने का रुख किसी एक सेक्टर तक सीमित नहीं था।
तकनीकी स्थिति पर उन्होंने कहा कि निफ्टी 24,000 के स्तर से नीचे फिसल गया है, जिससे निकट अवधि में बाजार की स्थिति कमजोर हुई है। अब 23,800-23,750 का स्तर महत्वपूर्ण सपोर्ट जोन है। यदि निफ्टी इस स्तर से नीचे लगातार बना रहता है तो बाजार में और गिरावट देखने को मिल सकती है। वहीं, 24,000-24,100 की ओर किसी भी रिकवरी को तत्काल बिकवाली के दबाव का सामना करना पड़ सकता है।
ट्रेडर, इन्वेस्टर और मार्केट कमेंटेटर कुणाल सराओगी ने कहा कि भारत में निवेश का मामला अब ज्यादा आकर्षक होता जा रहा है। उन्होंने कहा कि पिछले कुछ वर्षों में विदेशी संस्थागत निवेशकों (FIIs) की लगातार बिकवाली के बाद अब उनका रुख कुछ अधिक सकारात्मक दिखाई दे रहा है। उन्होंने कहा, "भारत में निवेश का मामला अब निश्चित रूप से ज्यादा दिलचस्प हो रहा है।
FIIs लगातार बिकवाली कर रहे थे और पिछले कुछ वर्षों में उन्होंने लगातार बाजार से पैसा निकाला। लेकिन अब इसमें बदलाव की शुरुआत होती दिख रही है। FIIs के आंकड़े सकारात्मक रहे हैं। MSA रीबैलेंसिंग के कारण भी भारत में काफी फंड आ रहा है।" सराओगी ने कहा कि आगे भी FIIs के बाजार को लेकर सकारात्मक बने रहने की उम्मीद है।