नेटवर्क 10 न्यूज चैनल ने 29 मार्च को ‘संत संसद’ कार्यक्रम का भव्य आयोजन किया। इस कार्यक्रम में देश के कोने-कोने से साधु-संत और महात्मा शामिल हुए। इस आयोजन का मुख्य विषय था— “अब नहीं होगा कोई जात-पात, बात होगी सिर्फ राष्ट्रवाद।” इस विषय पर संतों ने अपने विचार रखे और समाज से जातिवाद से ऊपर उठकर एकजुट होकर आगे बढ़ने का आह्वान किया।
इस विशेष कार्यक्रम में श्री महंत लोकेश दास जी महाराज भी उपस्थित रहे। अपने संबोधन में उन्होंने राष्ट्रवाद और सामाजिक एकता पर जोर देते हुए कहा कि हमें एक सशक्त राष्ट्रवादी समाज का निर्माण करना होगा। उन्होंने जगतगुरु शंकराचार्य जी महाराज के विचारों का उल्लेख करते हुए कहा कि “जाति दोष नहीं है, बल्कि जातिवाद दोष है।” इसलिए हमें जाति को नहीं, बल्कि जातिवाद को समाप्त करने की दिशा में काम करना चाहिए।
उन्होंने कहा जातिवाद एक सामाजिक रोग है और इसे समाप्त करने के लिए राष्ट्रवादी सोच को मजबूत करना होगा। उन्होंने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) को एक ऐसा संगठन बताया, जो राष्ट्रवाद की भावना को सशक्त करता है। साथ ही उन्होंने कहा कि जब संत समाज और ऐसे संगठन एक साथ आएंगे, तभी इस समस्या का प्रभावी समाधान संभव होगा।
महाराज ने कार्यक्रम में आह्वान करते हुए कहा कि अब समय आ गया है कि हम पुरानी सोच को छोड़कर एक नई शुरुआत करें। उन्होंने कहा कि अभिव्यक्ति की लड़ाई हम काफी लड़ चुके हैं, अब राष्ट्रवाद को केंद्र में रखकर आगे बढ़ने की आवश्यकता है।
अपने संबोधन के दौरान उन्होंने नेटवर्क10 के एडिटर-इन-चीफ संजय गिरी का धन्यवाद करते हुए कहा कि इतने बड़े स्तर पर संतों का एक साथ दर्शन केवल कुंभ जैसे आयोजनों में ही संभव होता है, लेकिन इस मंच के माध्यम से यह अवसर सभी को प्राप्त हुआ। उन्होंने बताया कि यह चौथी धर्म संसद है—पहली अयोध्या में, उसके बाद नोएडा, फिर मुंबई और अब वीरों की भूमि जयपुर में इसका आयोजन हो रहा है। उन्होंने इस पावन भूमि को नमन भी किया।
अंत में महाराज ने अपने गुरुदेव जगतगुरु रामानंदाचार्य स्वामी हंसदेवाचार्य जी महाराज के मूल सिद्धांतों को याद करते हुए कहा कि उनका संदेश था—“जात-पात पूछे न कोई, हरि को भजे सो हरि का होए।” उन्होंने कहा कि इस विचार को कहना आसान है, लेकिन इसे जीवन में उतारना ही सच्ची साधना है। उन्होंने सभी से आग्रह किया कि समाज में समानता, एकता और राष्ट्रवाद की भावना को अपनाकर एक मजबूत और समरस भारत के निर्माण में योगदान दें।