जयपुर में आयोजित ‘संत संसद 2026’ में आस्था के साथ देशप्रेम का विशेष संगम देखने को मिला। इस भव्य कार्यक्रम का आयोजन नेटवर्क 10 न्यूज चैनल द्वारा किया गया। शुरुआत में संतों ने अमर जवान ज्योति पर पहुंचकर शहीदों को नमन किया। वहीं, महिलाओं ने कलश यात्रा के जरिए संतों का जोरदार स्वागत किया। कार्यक्रम में राजस्थान के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा मुख्य अतिथि के रूप में मौजूद रहे और उन्होंने नेटवर्क 10 की इस पहल की सराहना की।
इस विशेष कार्यक्रम में अजमेर से स्वामी श्री अनादि सरस्वती जी महाराज भी शामिल हुई। अपने संबोधन की शुरुआत उन्होंने वैदिक मंत्रों और स्तुति के साथ की—
“या देवी सर्वभूतेषु शक्ति रूपेण संस्थिता… नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः।
या देवी सर्वभूतेषु मातृ रूपेण संस्थिता… नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः।”
इसके साथ ही उन्होंने गुरु वंदना करते हुए “श्री गुरु चरण सरोज रज…” का पाठ किया और जयकारों के साथ वातावरण को आध्यात्मिक ऊर्जा से भर दिया।
अपने प्रवचन में उन्होंने कहा कि गुरु से बड़ा कोई नहीं होता। गुरु वह दिव्य तत्व है, जो मनुष्य को अंधकार से प्रकाश की ओर ले जाता है और उसी प्रकाश में व्यक्ति स्वयं के वास्तविक स्वरूप को पहचान पाता है। उन्होंने कहा कि हमारे जीवन में जो भी ज्ञान, वाणी, कर्म, सत्संग या प्रवचन हो रहे हैं, वह सब गुरु की कृपा का ही परिणाम है।
स्वामी जी ने आगे कहा कि हम सभी सनातन धर्म के अनुयायी हैं और हमारा यह कर्तव्य है कि हम अपनी मातृभूमि का सम्मान करें। उन्होंने कहा कि जन्मभूमि और मातृभूमि का स्थान स्वर्ग से भी ऊंचा होता है। धरती को मां इसलिए कहा गया है, क्योंकि वह हमारी हर अवस्था—सुख-दुख, विकार और भार—को सहन कर हमें संभालती है।
अंत में उन्होंने सभी से आह्वान किया कि गुरु के मार्गदर्शन में रहकर सनातन मूल्यों का पालन करें, अपने कर्तव्यों को समझें और समाज में सकारात्मकता व समरसता का संदेश फैलाएं।