Karnataka: सूचना प्रौद्योगिकी कंपनी विप्रो ने गुरुवार को 15,000 करोड़ रुपये के शेयर पुनर्खरीद कार्यक्रम की घोषणा की। ये कंपनी का अब तक का सबसे बड़ा पुनर्खरीद प्रस्ताव है, जो 2023 में किए गए 12,000 करोड़ रुपये की पुनर्खरीद से ज्यादा है।
हालांकि, हाल के समय में प्रतिस्पर्धी कंपनियों की इसी तरह की पेशकश से कम है। इन्फोसिस ने पिछले साल नवंबर में 18,000 करोड़ रुपये के अब तक के सबसे बड़े पुनर्खरीद प्रस्ताव को पूरा किया था, जबकि टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (टीसीएस) ने दिसंबर, 2023 में 17,000 करोड़ रुपये की शेयर पुनर्खरीद को पूरा किया था।
अब तक किसी भी भारतीय कंपनी का सबसे बड़ा शेयर वापस खरीदने का रिकॉर्ड 18,000 करोड़ रुपये है। शेयर पुनर्खरीद आमतौर पर शेयरधारकों को अतिरिक्त नकदी वापस करने, प्रति शेयर आय में सुधार करने और संबंधित कंपनी की वित्तीय स्थिति में भरोसा जताने के लिए की जाती है।
विप्रो ने शेयर बाजार को दी सूचना में कहा कि उसके निदेशक मंडल ने निविदा पेशकश के माध्यम से 250 रुपये प्रति शेयर भाव पर शेयर पुनर्खरीद के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है। ये कंपनी का लगभग तीन सालों में पहला शेयर पुनर्खरीद कार्यक्रम है।
विप्रो ने कहा, ‘‘निदेशक मंडल ने दो रुपये अंकित मूल्य के 60 करोड़ इक्विटी शेयर (कुल चुकता इक्विटी शेयर पूंजी का 5.7 प्रतिशत) तक के पुनर्खरीद प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है। ये शेयरधारकों की डाक मतपत्र द्वारा स्वीकृति पर निर्भर है। ये खरीद निविदा पेशकश के माध्यम से आनुपातिक आधार पर 250 रुपये (2.66 अमेरिकी डॉलर) प्रति इक्विटी शेयर के हिसाब से की जाएगी, जिसकी कुल राशि 150 अरब रुपये (1.6 अरब डॉलर) से ज्यादा नहीं होगी।”
कंपनी का शेयर बीएसई में गुरुवार को 210.20 रुपये पर बंद हुआ। इस लिहाज से पुनर्खरीद मूल्य लगभग 19 प्रतिशत ज्यादा है। विप्रो की मुख्य वित्त अधिकारी अपर्णा अय्यर ने वित्तीय परिणाम की जानकारी देते हुए कहा कि शेयरधारकों की स्वीकृति पर निर्भर पुनर्खरीद प्रक्रिया 2027 की पहली तिमाही में पूरी होने की उम्मीद है।