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साइबर सुरक्षा के लिए एआई में आत्मनिर्भरता बेहद जरूरी: गगनयान यात्री

कोच्चि, पांच सितंबर (भाषा) गगनयान यात्री और भारतीय वायुसेना के पायलट प्रशांत बालकृष्णन नायर ने शनिवार को कहा कि राष्ट्रीय साइबर सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए एआई (कृत्रिम मेधा) में आत्मनिर्भरता बेहद जरूरी है।

उन्होंने कहा कि कृत्रिम मेधा के बढ़ते इस्तेमाल से असली और नकली सामग्री में अंतर करना लगातार मुश्किल होता जा रहा है।

नायर ने केरल स्टार्टअप मिशन और एफ9 इन्फोटेक की ओर से आयोजित ‘केरल साइबर सुरक्षा शिखर सम्मेलन 2026’ को संबोधित करते हुए कहा कि जब तक देश एआई तकनीकों पर अपना स्वामित्व और नियंत्रण विकसित नहीं करता, तब तक साइबर सुरक्षा का लाभ सीमित ही रहेगा।

उन्होंने कहा, “यह बहुत जरूरी है कि हमारे पास एआई में आत्मनिर्भरता हो। जब तक हमारा अपना एआई नहीं होगा, तब तक किसी भी स्तर की साइबर सुरक्षा का कोई खास लाभ नहीं होगा।”

नायर ने कहा कि भविष्य के युद्धों और उद्योगों में ''पूरे देश की भागीदारी वाली रणनीति'' अपनाई जाएगी। ऐसे में भौतिक और डिजिटल सीमाओं के बीच अंतर करना लगातार मुश्किल होता जाएगा।

उन्होंने कहा कि एआई, साइबर तकनीक और डिजिटल परिवेश के रोजमर्रा की जिंदगी में बढ़ते एकीकरण के बीच साइबर सुरक्षा और डिजिटल खतरों के प्रति जागरूकता बढ़ाना बेहद जरूरी है।

उन्होंने कहा, “हम सभी डिजिटल तकनीक का इस्तेमाल कर रहे हैं और अब एआई भी आ रहा है। हम भूल जाते हैं कि कौन-सी चीज असली है और कौन-सी नकली।”

गगनयान यात्री ने कहा, “यह सुनिश्चित करना जरूरी है कि पुराने समय की तरह हम अपनी महत्वपूर्ण चीजों को तिजोरी में सुरक्षित रखकर उस पर ताला लगाते थे, उसी तरह डिजिटल दुनिया में भी हमें अपनी सुरक्षा सुनिश्चित करनी होगी।”

नायर ने कहा कि भारत ने अगस्त 2023 में चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुवीय क्षेत्र के पास सफलतापूर्वक उतरने वाले चंद्रयान-3 मिशन के जरिए अपनी तकनीकी क्षमता का प्रदर्शन किया है।

उन्होंने कहा, “ याद रखिए कि हम सभी भारतीय हैं और हमारे अंदर वह क्षमता है। हम ही वो लोग हैं जिन्होंने 23 अगस्त 2023 को चंद्रयान-3 को चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव पर पहुंचाया, जो अब तक कोई और नहीं कर सका है।”

भाषा जितेंद्र पवनेश

पवनेश