योगी सरकार शिक्षा व्यवस्था को मजबूत करने के साथ-साथ उसे संचालित करने वाले मानव संसाधन की दक्षता बढ़ाने पर भी जोर दे रही है। इसी दिशा में बेसिक और माध्यमिक शिक्षा विभाग के अधिकारियों एवं कर्मचारियों के लिए मिशन कर्मयोगी पोर्टल के जरिए न्यूनतम दो कोर्स पूरा करना अनिवार्य किया गया है। खासतौर पर ऐसे कार्मिकों को प्राथमिकता के आधार पर प्रशिक्षण पूरा कराया जाएगा, जिन्होंने अभी तक कोई कोर्स पूरा नहीं किया है या जिनके कोर्स अधूरे हैं।
सरकार का मानना है कि विद्यालयों में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और विभागीय योजनाओं को प्रभावी तरीके से लागू करने के लिए कार्मिकों का लगातार सीखते रहना और अपनी कार्यक्षमता को बढ़ाना जरूरी है। इसी उद्देश्य से नियमित प्रशिक्षण को शिक्षा विभाग की कार्यसंस्कृति का हिस्सा बनाया जा रहा है।महानिदेशक, स्कूल शिक्षा मोनिका रानी के निर्देश के अनुसार प्रत्येक कार्यालयाध्यक्ष को स्वयं भी निर्धारित कोर्स पूरा करना होगा। साथ ही अपने अधीनस्थ अधिकारियों और कर्मचारियों को भी प्रशिक्षण पूरा कराने की जिम्मेदारी निभानी होगी।
इस व्यवस्था का उद्देश्य प्रशिक्षण को केवल उच्च स्तर के कार्यालयों तक सीमित रखने के बजाय विभागीय कार्यालयों से लेकर विद्यालय स्तर तक पहुंचाना है। इससे शिक्षा विभाग के अलग-अलग स्तरों पर काम कर रहे कर्मचारियों को एक समान क्षमता विकास प्रक्रिया से जोड़ा जा सकेगा। राज्य शैक्षिक तकनीकी संस्थान (एसआईईटी) के निदेशक एवं मिशन कर्मयोगी के बेसिक शिक्षा नोडल डॉ. मुकेश चंद्र के अनुसार कार्मिकों की सुविधा के लिए छह कोर्स चयनित किए गए हैं। इनमें शामिल हैं—
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स्क्रीन टाइम प्रबंधन एवं डिजिटल जीवनशैली
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इंग्लिश वोकैबुलरी: कॉमनली मिसयूज्ड एंड कन्फ्यूज्ड वर्ड्स
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पूर्व प्राथमिक स्तर के लिए प्रभावी शिक्षण विधियां
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योगा ब्रेक एट वर्कप्लेस
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स्ट्रेस मैनेजमेंट
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बेसिक्स ऑफ प्रोजेक्ट मैनेजमेंट
इन कोर्स के जरिए कार्मिकों को डिजिटल जीवनशैली, प्रभावी शिक्षण, तनाव प्रबंधन और कार्यस्थल से जुड़ी जरूरी दक्षताओं के बारे में प्रशिक्षण दिया जाएगा। इससे उन्हें अपनी जिम्मेदारियों के अनुसार नई जानकारी और कार्य-कौशल विकसित करने में मदद मिलेगी। निर्देशों में स्पष्ट किया गया है कि जिन कार्मिकों ने अभी तक कोई कोर्स पूरा नहीं किया है या जिनके प्रशिक्षण अधूरे हैं, उन्हें प्राथमिकता दी जाएगी। कार्यालयाध्यक्षों को ऐसे कर्मचारियों का प्रशिक्षण जल्द पूरा कराने की जिम्मेदारी दी गई है।
मिशन कर्मयोगी के जरिए कार्मिकों को बदलती जरूरतों के अनुसार खुद को अपडेट करने और नई कार्यक्षमताएं विकसित करने का अवसर मिलेगा। सरकार की इस पहल में निरंतर सीखने को बेहतर कार्य निष्पादन की अहम कड़ी माना जा रहा है। शिक्षा विभाग की इस व्यवस्था के तहत प्रशिक्षण से जुड़ी जानकारी को विद्यालय स्तर तक पहुंचाने और अधिकारियों-कर्मचारियों की सहभागिता सुनिश्चित करने पर भी जोर दिया जाएगा। इससे विभागीय कार्यालयों से लेकर स्कूलों तक काम करने वाले कर्मचारियों को साझा क्षमता विकास प्रक्रिया से जोड़ा जा सकेगा।
बेसिक शिक्षा राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) संदीप सिंह ने कहा कि योगी सरकार शिक्षा व्यवस्था को मजबूत करने के साथ उसके मानव संसाधन की दक्षता और क्षमता बढ़ाने को भी प्राथमिकता दे रही है। मिशन कर्मयोगी के जरिए कार्मिकों को लगातार सीखने और अपने कार्य-कौशल को विकसित करने का अवसर मिल रहा है। उन्होंने कहा कि दक्ष और संवेदनशील मानव संसाधन ही सरकार की शिक्षा नीतियों को प्रभावी ढंग से धरातल तक पहुंचाने में अहम भूमिका निभाता है।
महानिदेशक, स्कूल शिक्षा मोनिका रानी ने कहा कि मिशन कर्मयोगी के माध्यम से विभागीय कार्मिकों के सतत क्षमता विकास को गति दी जा रही है। प्रयास है कि प्रत्येक कार्मिक निर्धारित प्रशिक्षण पूरा करे और इस सीखने की प्रक्रिया को अपने दैनिक कार्य से जोड़े। उन्होंने विशेष रूप से उन कार्मिकों का प्रशिक्षण प्राथमिकता से पूरा कराने के निर्देश दिए हैं, जिनके कोर्स अभी तक अधूरे हैं या जिन्होंने कोई प्रशिक्षण पूरा नहीं किया है।