मुंबई, पांच सितंबर (भाषा) विश्व हिंदू परिषद (विएचपी) ने महाराष्ट्र में अगले महीने होने वाले नवरात्रि उत्सव के दौरान 'गरबा' और 'डांडिया' कार्यक्रमों में मुसलमानों के शामिल होने पर रोक लगाने का फैसला किया है। साथ ही, आयोजकों के लिए प्रतिभागियों की हिंदू पहचान की पुष्टि करने के लिए 'दिशानिर्देश' भी तय किए हैं।
इन उपायों में कार्यक्रम में आने वालों के आधार कार्ड की जांच करना और उनके माथे पर 'तिलक' लगाना शामिल हैं।
नवरात्रि उत्सव 11 अक्टूबर से शुरू होगा।
विहिप के प्रवक्ता और संयुक्त सचिव श्रीराज नायर ने कहा कि संगठन ने गरबा और डांडिया कार्यक्रमों में मुस्लिम समुदाय के लोगों की भागीदारी रोकने का निर्णय लिया है।
नायर ने कहा, 'हमने नवरात्रि उत्सव के दौरान गरबा-डांडिया नृत्य में मुसलमानों को भाग लेने की अनुमति नहीं देने का फैसला किया है।'
उन्होंने कहा, 'नवरात्रि केवल गीत और नृत्य का त्योहार नहीं है, बल्कि यह देवी की पूजा का पर्व है। जो मुसलमान मूर्ति पूजा के खिलाफ हैं, उन्हें इस उत्सव में क्यों शामिल होना चाहिए?'
विहिप ने आयोजकों के लिए जारी दिशा-निर्देशों में कार्यक्रम में आने वाले लोगों के आधार कार्ड की जांच करने और उनके माथे पर तिलक लगाने जैसे कदमों का उल्लेख किया है, ताकि उनकी हिंदू पहचान सुनिश्चित की जा सके।
नायर ने कहा कि इन प्रतिबंधों का मतलब यह नहीं है कि विहिप किसी खास समुदाय के खिलाफ है। उन्होंने इन्हें एहतियाती कदम बताया, जिनका मकसद हिंदू त्योहारों की सांस्कृतिक पहचान की रक्षा करना है।
उन्होंने कहा, 'विहिप धर्मांतरण और गो-हत्या रोकने के अपने मुख्य एजेंडे पर कोई समझौता करने को तैयार नहीं है, उसका मानना है कि त्योहार हिंदुओं की सांस्कृतिक विरासत का अहम हिस्सा हैं और वह इसे कमजोर नहीं होने दे सकती। हालांकि, वह यह भी मानती है कि ये पाबंदियां एहतियाती उपाय हैं और मुसलमानों या किसी अन्य समुदाय के खिलाफ नहीं हैं।'
नायर की यह टिप्पणी राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) प्रमुख मोहन भागवत के न्यूयॉर्क के मैडिसन स्क्वायर में एक कार्यक्रम के दौरान दिए गए बयान के कुछ दिन बाद आई है। भागवत ने सार्वभौमिक एकता और सम्मान की जरूरत पर जोर दिया था।
भागवत ने कहा था, 'अगर कोई हिंदू यह सोचता है कि भारत में मुसलमान नहीं होने चाहिए, तो वह हिंदू नहीं रहेगा। अगर आप खुद को हिंदू कहलाना चाहते हैं, तो आपको यह मानना होगा कि सभी रास्ते एक ही मंजिल तक ले जाते हैं। हर इंसान की अपनी गरिमा होती है। मनुष्यों के बीच कोई फर्क नहीं होता।'
जब नायर से भागवत के बयान पर प्रतिक्रिया मांगी गई, तो उन्होंने कहा कि विहिप आरएसएस प्रमुख के बयान पर कोई टिप्पणी नहीं करेगी।
उन्होंने कहा, 'हम किसी के खिलाफ नहीं हैं। हम भी सामाजिक सद्भाव और शांति में विश्वास रखते हैं।'
हालांकि, नायर ने सवाल उठाया कि विहिप को उन लोगों के लिए अपने नियम में क्यों ढील देनी चाहिए, जो उनके अनुसार, इस त्योहार से जुड़ी धार्मिक मान्यताओं और पूजा-पद्धति को नहीं मानते हैं।
उन्होंने कहा, 'सवाल यह है कि जो मुसलमान हमारी धार्मिक मान्यताओं और पूजा पूजा-पद्धति को नहीं मानते, उनके लिए हम अपने दिशा-निर्देशों में ढील क्यों दें?'
नायर ने कहा, 'अगर मुसलमान नवरात्रि उत्सव में भाग लेना चाहते हैं, तो उन्हें अपने परिवार के सदस्यों, पत्नी और बहनों के साथ आना चाहिए। उन्हें मस्जिदों या अपने घरों में नवरात्रि उत्सव आयोजित करना चाहिए।'
भाषा
दिलीप शुभम
दिलीप