नयी दिल्ली, पांच सितंबर (भाषा) मध्यप्रदेश के बालाघाट जिले में गत सात दिन में खसरे का कोई नया मामला सामने नहीं आया है। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय के अधिकारियों ने शनिवार को यह जानकारी दी।
उन्होंने बताया कि यह कड़ी निगरानी, टीकाकरण, इलाज और बचाव के उपायों के बाद स्थिति में आए उत्साहजनक सुधार का संकेत है।
अधिकारियों ने बताया कि जुलाई के दूसरे हफ्ते में बिरसा प्रखंड के आदिवासी इलाकों से बुखार, शरीर पर दाने के साथ बुखार और उससे जुड़ी मौतों के मामले सामने आने के बाद से केंद्र और मध्यप्रदेश सरकार समन्वय के साथ इससे निपटने के लिए काम कर रही हैं।
बालाघाट में 12 अगस्त को राष्ट्रीय संयुक्त प्रकोप प्रतिक्रिया दल (एनजेओआरटी) को तैनात किया गया जबकि भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (आईसीएमआर) समेत राष्ट्रीय स्वास्थ्य संस्थान जांच में मदद कर रहे हैं।
अधिकारियों ने बताया कि चार अगस्त को राष्ट्रीय स्तर पर स्थिति की समीक्षा की गई, जिसमें महामारी विज्ञान संबंधी जानकारी, दर्ज मौतों, खसरे और मलेरिया से जुड़ी जानकारियों, प्रयोगशाला जांच, कीट-विज्ञान संबंधी आकलन और रोकथाम के उपायों पर चर्चा की गई।
उन्होंने बताया कि राष्ट्रीय स्तर पर की गई कार्रवाई में सार्वजनिक स्वास्थ्य निगरानी विशेषज्ञ, टीकाकरण विभाग और राष्ट्रीय वेक्टर जनित रोग नियंत्रण केंद्र (एनसीवीबीडीसी) के साथ-साथ आईसीएमएआर की एक स्वतंत्र जांच टीम भी शामिल हुई है।
अधिकारियों ने बताया कि आईसीएमआर-जबलपुर और नेताजी सुभाष चंद्र बोस चिकित्सा महाविद्यालय, जबलपुर की टीम भी प्रभावित इलाकों का दौरा कर रही हैं और राज्य के अधिकारियों को तकनीकी ‘फीडबैक’ दे रही हैं।
उन्होंने बताया कि निगरानी नेटवर्क का दायरा अब तीन गांवों से बढ़ाकर लगभग 50 गांवों तक कर दिया गया है, और स्क्रीनिंग व इलाज के लिए 10 से अधिक चिकित्सक और 10 सामुदायिक स्वास्थ्य अधिकारी नियमित सेवाएं दे रहे हैं।
अधिकारियों ने बताया कि दूर-दराज के आदिवासी और खास तौर पर कमज़ोर आदिवासी समूहों (पीवीटीजी) वाले इलाकों में बुखार की जांच, बाहरी मरीज सेवाएं, मां और बच्चे की सेहत की देखभाल, क्षय रोग (टीबी) और गैर-संक्रामक बीमारियों की स्क्रीनिंग, जांच और दवाएं उपलब्ध कराने के लिए बिरसा और बैहर प्रखंड में छह सचल चिकित्सा इकाइयां तैनात की गई हैं।
अधिकारियों ने बताया कि अब तक 32,433 लोगों की जांच की गई है और 431 बच्चों को स्वास्थ्य केंद्रों में भर्ती कराया गया है। इनमें से 379 बच्चों का इलाज करके उन्हें छुट्टी दे दी गई है, जबकि 52 बच्चे अब भी निगरानी में हैं।
भाषा धीरज अविनाश
अविनाश