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जी7 शिखर सम्मेलन में प्रधानमंत्री मोदी ने एआई के दुरुपयोग के खिलाफ चेताया

एवियॉन (फ्रांस), 17 जून (भाषा) प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने बुधवार को कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) के गलत इस्तेमाल के खिलाफ चेतावनी दी। उन्होंने कहा कि अगर सुरक्षा के उपाय नहीं किए गए, तो इससे बच्चे गलत जानकारी, डीपफेक और शोषण के खतरे में पड़ सकते हैं।

फ्रांस में जारी जी7 शिखर सम्मेलन के एक सत्र को संबोधित करते हुए मोदी ने डीपफेक, गलत जानकारी और साइबर धोखाधड़ी के खिलाफ वैश्विक सहयोग को मजबूत करने का भी आह्वान किया।

मोदी ने कहा कि एआई बच्चों को उनकी अपनी भाषाओं में पढ़ा सकता है, उनकी रचनात्मकता को बढ़ा सकता है और सीखने के अनुभव को अधिक व्यक्तिगत बना सकता है। हालांकि, उन्होंने चेतावनी दी कि सुरक्षा उपायों के बिना यह प्रौद्योगिकी उन्हें गलत जानकारी, डीपफेक और शोषण जैसे खतरों में डाल सकती है।

‘सुरक्षित, त्वरित और प्रभावी एआई कार्यान्वयन सुनिश्चित करना’ विषय पर आयोजित जी7 सत्र को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा, ‘‘हमें डिजिटल दुनिया को बच्चों के लिए सीखने का मैदान बनाना चाहिए, न कि उन्हें प्रभावित और गुमराह करने का माध्यम।”

प्रधानमंत्री ने कहा कि इन दोनों स्थितियों के बीच का अंतर प्रौद्योगिकी का नहीं है; यह मूल्यों, डिजाइन और शासन का मामला है।

उन्होंने कहा कि एआई को लेकर हमारी सोच और नीति साफ होनी चाहिए। एआई का उद्देश्य मानव क्षमता का विस्तार करना, लोगों को अधिक विकल्प और अधिकार देना तथा मानवीय गरिमा की रक्षा करना होना चाहिए।

मोदी ने कहा कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता मानव द्वारा विकसित की गई सबसे परिवर्तनकारी प्रौद्योगिकियों में से एक है। उन्होंने कहा कि एआई की वास्तविक परीक्षा इस बात में नहीं है कि हमारी मशीनें कितनी शक्तिशाली बनती हैं, बल्कि इस बात में है कि आम व्यक्ति को उससे कितनी ताकत और अवसर मिलते हैं।

उन्होंने कहा कि इस साल भारत में आयोजित एआई इम्पैक्ट समिट में हमने इसी नजरिए से ‘मानव-केंद्रित एआई’ बनाने पर जोर दिया।

प्रधानमंत्री ने यह भी कहा कि जब तक सभी देश सुरक्षित नहीं हैं, तब तक कोई भी देश साइबरक्षेत्र में पूरी तरह सुरक्षित नहीं रह सकता।

उन्होंने कहा कि इसीलिए भारत ने हमेशा साइबरक्षेत्र में 'ग्लोबल पब्लिक गुड' (वैश्विक सार्वजनिक भलाई) के तौर पर देखा है।

भाषा

सुरभि प्रशांत

प्रशांत