नयी दिल्ली, 17 जून (भाषा) अपोलो हॉस्पिटल्स नेटवर्क और उसके पांच निदेशकों के खिलाफ विदेशी मुद्रा प्रबंधन अधिनियम (फेमा) उल्लंघन का मामला अब समाप्त कर दिया गया है। यह मामला भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) द्वारा “समझौता आदेश” जारी किए जाने और कारोबारी समूह द्वारा एकमुश्त 17.76 करोड़ से अधिक की राशि का भुगतान करने के बाद बंद किया गया है। इसके अलावा, कार्यकारी अधिकारियों ने 18-18 लाख रुपये का भुगतान भी किया है। प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने बुधवार को यह जानकारी दी।
केंद्रीय एजेंसी ने एक बयान में कहा कि जांच के बाद फेमा के तहत सुनवाई के लिए तय किए गए कथित चार उल्लंघनों की कुल रकम 2,424 करोड़ रुपये से अधिक थी।
एजेंसी ने बताया कि आरबीआई ने अपोलो हॉस्पिटल्स एंटरप्राइजेज लिमिटेड और उससे जुड़े पांच निदेशकों/अधिकारियों - प्रीता रेड्डी, सुनीता रेड्डी, एस के वेंकटरमन, अखिलेश्वरन कृष्णन और एस एम कृष्णन - के मामले में फेमा की धारा 15 के तहत समझौता आदेश जारी किया है।
इस आदेश के बाद फेमा के तहत कंपनी के खिलाफ जारी सभी न्यायिक कार्रवाइयां समाप्त कर दी गई हैं और आगे किसी प्रकार की कानूनी कार्रवाई या मुकदमा नहीं होगा।
ईडी से ‘‘कोई आपत्ति नहीं’’ मिलने के बाद आरबीआई ने यह आदेश जारी किया।
एजेंसी ने कहा कि उसने कंपनी और उसके निदेशकों द्वारा फेमा के नियमों के उल्लंघन के चार मामलों में जांच की थी। इन कथित उल्लंघनों की कुल राशि 2,424 करोड़ रुपये से अधिक थी।
एजेंसी ने कहा, ‘‘इन उल्लंघनों का निपटारा अपोलो हॉस्पिटल्स एंटरप्राइजेज लिमिटेड द्वारा एक बार में 17,76,80,121 रुपये और ऊपर बताए गए निदेशकों/अधिकारियों में से प्रत्येक द्वारा 18 लाख रुपये के भुगतान के साथ किया गया है।’’
नियामक संदर्भ में ‘‘समझौता आदेश’’ का अर्थ होता है—किसी प्राधिकारी द्वारा लिया गया औपचारिक फैसला, जिसमें दोषी को कानूनी कार्रवाई का सामना करने के बजाय आर्थिक जुर्माना भरने की अनुमति देकर मामले को सुलझाया जाता है।
भाषा सुरभि प्रशांत
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