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‘गुरु द्रोही’ मामला: विपक्ष का मान पर हमला तेज, भाजपा नेता ने प्राथमिकी दर्ज करने की मांग की

चंडीगढ़, 17 जून (भाषा) सिखों की सर्वोच्च धार्मिक संस्था ‘अकाल तख्त’ द्वारा एक कथित आपत्तिजनक वीडियो मामले में पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान को ‘गुरु द्रोही’ घोषित किये जाने के बाद राज्य की विपक्षी पार्टियों ने मान के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। इसी कड़ी में भाजपा नेता जगमोहन सिंह राजू ने बुधवार को मुख्यमंत्री के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करने की मांग की।

यह मामला इस साल जनवरी में अकाल तख्त द्वारा मान को बुलाए जाने से जुड़ा है। उनपर ‘गुरु की गोलक’ (गुरुद्वारे के दान-पात्र) के बारे में कथित तौर पर टिप्पणी करने और एक कथित वीडियो क्लिप में सिख गुरुओं एवं मारे गए उग्रवादी जरनैल सिंह भिंडरांवाले की तस्वीरों के साथ ‘आपत्तिजनक गतिविधियों’ में संलिप्त होने का आरोप था।

अमृतसर में सोमवार को अकाल तख्त के जत्थेदार ज्ञानी कुलदीप सिंह गड़गज के अकाल तख्त की ‘फसील’ (मंच) से मुख्यमंत्री के खिलाफ आदेश जारी करने के बाद से विपक्षी पार्टियां मान के इस्तीफे की मांग कर रही हैं।

हालांकि, मान ने आरोपों को खारिज किया है और मंगलवार को दावा किया कि वीडियो क्लिप में दिखाई दे रहा व्यक्ति वह नहीं हैं।

भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के नेता राजू ने पंजाब के राज्यपाल गुलाब चंद कटारिया को पत्र लिखकर मान के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कराने की मांग की। उन्होंने कहा कि अकाल तख्त ने उक्त आपत्तिजनक वीडियो को ‘प्रमाणिक’ पाया है।

राजू ने राज्यपाल को लिखे पत्र में आरोप लगाया, ‘‘मीडिया में बड़े पैमाने पर यह खबर आई है कि अकाल तख्त साहिब के सम्मानित जत्थेदार ने सार्वजनिक रूप से कहा है कि अकाल तख्त द्वारा करवाई गई फॉरेंसिक जांच में पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान का उक्त वीडियो प्रमाणिक पाया गया है।’’

उन्होंने कहा कि इससे सिख समुदाय, और खासकर मुझे, गहरी ठेस पहुंची है और धार्मिक सद्भाव खतरे में पड़ गया है।

राजू ने कहा कि इसलिए कानून की संबंधित धाराओं के तहत प्राथमिकी दर्ज की जाए और मामले की तत्काल जांच की जाए।

भाजपा नेता ने कहा कि चूंकि पंजाब पुलिस गृह मंत्री के तौर पर मान के अधीन काम करती है, इसलिए यह अनुरोध किया जाता है कि निष्पक्ष जांच के लिए यह मामला केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) को सौंपा जाए।

भाजपा सांसद और राष्ट्रीय महासचिव तरुण चुघ ने कहा कि सिखों की सर्वोच्च संस्था अकाल तख्त द्वारा ‘गुरु द्रोही’ घोषित किए जाने के बाद मान के पास पद पर बने रहने का नैतिक अधिकार नहीं रह गया है।

उन्होंने सवाल किया कि जब अकाल तख्त ने उन्हें सिखों की भावनाओं को ठेस पहुंचाने का दोषी पाया है, तो वह पंजाब का नेतृत्व कैसे कर सकते हैं?

कांग्रेस सांसद सुखजिंदर सिंह रंधावा ने कहा कि अकाल तख्त साहिब ‘सिख पंथ’ की शान है। उन्होंने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में कहा, ‘‘कोई भी इसकी शान को कम नहीं कर सकता, चाहे कोई कितने ही ऊंचे पद पर क्यों न हो। ‘पंथ’ की सर्वोच्च संस्था के सामने हर पद छोटा है और हर सिख अपना सिर झुकाता है।’’

कांग्रेस नेता ने कहा, ‘‘गुरदासपुर से सांसद बनने से पहले मैं एक गुरसिख हूं। मेरे लिए मेरा पद नहीं, बल्कि गुरु घर के प्रति मेरी श्रद्धा और श्री अकाल तख्त साहिब के प्रति मेरा सम्मान सबसे ऊपर है। जब भी पंथ की सर्वोच्च संस्था का कोई आदेश आता है, तो उसके सामने हर पद और हर राजनीतिक पहचान छोटी हो जाती है।’’

भाषा धीरज सुरेश

सुरेश