Breaking News

पटना में छात्रों का प्रोटेस्ट: तेज प्रताप को पटना पुलिस ने हिरासत में लिया     |   'पहले शिक्षा मंत्री को हटाओ, फिर होगी बात', राहुल गांधी ने मोदी सरकार को दिया अल्टीमेटम     |   क्या मुझे चरित्र प्रमाण पत्र लेने की जरूरत है कि मेरा उपवास पवित्र था: वांगचुक     |   हम न्यूक्लियर पावर की अगली पीढ़ी को बढ़ाने में कर रहे दुनिया का नेतृत्व: ट्रंप     |   आज से आगरा के दो दिवसीय दौरे पर रहेंगे मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ     |  

एसएलएसएसएन ने कंधमाल दंगों की जांच रिपोर्ट के गायब होने पर चिंता जताई

भुवनेश्वर, 16 जून (भाषा) ओडिशा के मुख्यमंत्री कार्यालय (सीएमओ) से 2008 के कंधमाल दंगों से संबंधित जांच आयोग की रिपोर्ट कथित तौर पर गायब होने पर चिंता जताते हुए स्वामी लक्ष्मणानंद सरस्वती स्मृति न्यास (एसएलएसएसएन) ने राज्य सरकार से संबंधित आयोगों की रिपोर्ट सार्वजनिक करने का आग्रह किया है, ताकि पारदर्शिता सुनिश्चित की जा सके।

संगठन ने मंगलवार को एक बयान में बताया कि एसएलएसएसएन के एक प्रतिनिधिमंडल ने 14 जून को मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी के साथ बैठक के दौरान यह मांग उठाई।

बयान के अनुसार, प्रतिनिधिमंडल ने न्यायमूर्ति शरत चंद्र महापात्र द्वारा सौंपी गई अंतरिम रिपोर्ट और न्यायमूर्ति बासुदेब पाणिग्रही आयोग की अंतिम रिपोर्ट को सार्वजनिक करने का आग्रह किया, ताकि राज्य के लोगों को 2008 की हिंसा से जुड़े तथ्यात्मक निष्कर्षों से अवगत कराया जा सके।

न्यायमूर्ति महापात्र को 2008 में स्वामी लक्ष्मणानंद सरस्वती की हत्या और उसके बाद कंधमाल में हुई हिंसा की जांच के लिए एक सदस्यीय आयोग के रूप में नियुक्त किया गया था। इस मामले की अंतिम रिपोर्ट सौंपने से पहले ही 2012 में उनका निधन हो गया।

अधिकारियों ने बताया कि उनके निधन के बाद जांच न्यायमूर्ति ए. एस. नायडू को सौंपी गई, जिन्होंने अपनी अंतिम रिपोर्ट प्रस्तुत की। बाद में पिछली बीजू जनता दल सरकार के कार्यकाल में सीएमओ से इस रिपोर्ट के गायब होने की सूचना मिली। इस संबंध में कैपिटल थाने में प्राथमिकी दर्ज की गई है।

न्यायमूर्ति महापात्र ने अपने निधन से पहले एक जुलाई 2009 को 28 पन्नों की अंतरिम रिपोर्ट सौंपी थी, जिसमें कंधमाल में हिंसा की पुनरावृत्ति रोकने के उपाय सुझाए गए थे।

वर्ष 2008 के बड़े पैमाने पर दंगों से पहले कंधमाल में 2007 में स्वामी लक्ष्मणानंद सरस्वती पर हमले और क्रिसमस समारोह के दौरान झड़प की घटनाएं हुई थीं, जिसके बाद न्यायमूर्ति बासुदेव पाणिग्रही आयोग का गठन किया गया था, जिसने 2015 में अपनी रिपोर्ट सौंपी।

एसएलएसएसएन ने अब दोनों आयोगों की रिपोर्ट सार्वजनिक करने की मांग की है।

भाषा

प्रचेता प्रशांत

प्रशांत