भुवनेश्वर, 31 मई (भाषा) ओडिशा के राज्यपाल हरि बाबू कंभमपति ने रविवार को राज्य के विश्वविद्यालयों से भारतीय मूल्यों में दृढ़ विश्वास कायम रखते हुए वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी, सामाजिक रूप से जिम्मेदार और तकनीकी रूप से उन्नत संस्थानों के रूप में विकसित होने का आह्वान किया।
राज्य के सरकारी और निजी विश्वविद्यालयों के कुलपतियों के सम्मेलन को संबोधित करते हुए राज्यपाल कंभमपति ने कहा कि तीव्र तकनीकी प्रगति, उभरते विषयों और नयी वैश्विक चुनौतियों के कारण विश्व अभूतपूर्व बदलाव के दौर से गुजर रहा है।
उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि उच्च शिक्षा संस्थानों को छात्रों को ज्ञान, कौशल और मूल्यों से लैस करना चाहिए जो तेजी से जटिल होते भविष्य का सामना करने के लिए आवश्यक हैं।
राज्यपाल ने कहा कि विश्वविद्यालय ज्ञान, नवाचार और नेतृत्व के केंद्र हैं और राष्ट्र निर्माण में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका है। उन्होंने कहा कि उच्च शिक्षा संस्थानों को आत्मनिर्भर भारत के निर्माण और राज्य को भविष्य की चुनौतियों के लिए तैयार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभानी चाहिए।
उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालयों को उद्यमिता और नवाचार को बढ़ावा देना चाहिए ताकि युवा समाज के विकास और प्रगति के उत्प्रेरक बन सकें।
राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 की परिवर्तनकारी क्षमता को रेखांकित करते हुए कंभमपति ने कहा कि यह नीति बहुविषयक शिक्षा, अकादमिक लचीलापन, कौशल एकीकरण, डिजिटल शिक्षा, अनुसंधान उत्कृष्टता और मजबूत उद्योग साझेदारी को बढ़ावा देती है।
उन्होंने नीति के कार्यान्वयन के लिए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी, केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान और ओडिशा सरकार के प्रयासों की सराहना की।
ओडिशा की समृद्ध आदिवासी विरासत की ओर ध्यान आकर्षित करते हुए राज्यपाल ने विश्वविद्यालयों से स्वदेशी ज्ञान प्रणालियों, आदिवासी परंपराओं और सांस्कृतिक संरक्षण पर सार्थक अनुसंधान करने का आग्रह किया।
सम्मेलन को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी ने कहा कि विश्वविद्यालय केवल डिग्री प्रदान करने वाले संस्थान नहीं हैं, बल्कि वे ज्ञान के सृजन, नवाचार और अनुसंधान के केंद्र हैं।
उन्होंने राज्य सरकार द्वारा शिक्षा क्षेत्र के लिए बढ़ाए गए बजटीय आवंटन पर प्रकाश डाला और उच्च शिक्षा को मजबूत करने के उद्देश्य से कई पहल की रूपरेखा प्रस्तुत की।
माझी ने शैक्षणिक संस्थानों से समावेशी विकास के लिए रोडमैप तैयार करने और ओडिशा को देश के प्रमुख विकास इंजन में बदलने में मदद करने का आह्वान किया।
भाषा अविनाश वैभव
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