नयी दिल्ली, 31 मई (भाषा) राज्यसभा के उपसभापति हरिवंश ने रविवार को कहा कि देश हिंदी पत्रकारिता की 200वीं वर्षगांठ मना रहा है और ऐसे में समाज को ‘‘गंभीर आत्मावलोकन’’ करना चाहिए।
इस अवसर के उपलक्ष्य में इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला केंद्र (आईजीएनसीए) में आयोजित संगोष्ठी के दूसरे दिन उन्होंने सवाल किया, ‘‘आज हमारी पत्रकारिता, विशेषकर हिंदी पत्रकारिता, अपने आसपास के महत्वपूर्ण मुद्दों के प्रति कितनी सतर्क है।’’
कलकत्ता (अब कोलकाता) से 20 मई 1826 को साप्ताहिक 'उदंत मार्तंड' प्रकाशित हुआ था जिसके जरिये भारत में हिंदी पत्रकारिता की शुरुआत हुई।
हरिवंश ने कहा कि 'उदंत मार्तंड' के ‘मास्टहेड’ के नीचे संस्कृत में एक वाक्य लिखा होता था, जिसका अर्थ है - ‘‘जिस तरह सूरज की रोशनी के बिना अंधेरा दूर नहीं हो सकता, उसी तरह समाचार के बिना लोगों को सूचित नहीं किया जा सकता। इसलिए, मैं एक अखबार प्रकाशित करने का प्रयास कर रहा हूं।’’
आईजीएनसीए द्वारा जारी एक बयान में उनके हवाले से कहा गया, ‘‘पत्रकारिता का कर्तव्य है...जिस तरह सूरज की रोशनी अंधेरे को दूर करती है, सूचना और ज्ञान लोगों के बीच अज्ञानता को दूर करता है।’’
अपने संबोधन में राज्यसभा के उपसभापति ने 5 सितंबर 1826 को 'विलायती कपड़ा' शीर्षक से प्रकाशित 'उदंत मार्तंड' की एक रिपोर्ट का भी हवाला दिया।
उन्होंने कहा, ‘‘इसमें कहा गया था कि नौ साल के भीतर, ब्रिटेन से कपड़े का आयात सालाना डेढ़ लाख रुपये से बढ़कर 60 करोड़ रुपये हो गया है। आंकड़ों की सावधानीपूर्वक गणना करके, रिपोर्ट में भारत के आर्थिक शोषण पर सवाल उठाया गया था।’’
हरिवंश ने कहा, ‘‘मैं खुद से पूछता हूं कि आज हमारी पत्रकारिता, खासकर हिंदी पत्रकारिता, ऐसे आर्थिक मुद्दों के प्रति कितनी सतर्क है।’’
उन्होंने कहा, ‘‘200 साल पहले शुरू हुई पत्रकारिता राष्ट्र से प्रेरित थी। आज की पत्रकारिता में वह राष्ट्र कहां है? हिंदी पत्रकारिता की 200वीं वर्षगांठ के अवसर पर, हमें गंभीर आत्मावलोकन करना चाहिए।’’
भाषा सुभाष नरेश
नरेश