नयी दिल्ली, 31 मई (भाषा) प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के पूर्व विशेष निदेशक सत्यब्रत कुमार ने स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति (वीआरएस) ले ली है। वह नीरव मोदी, विजय माल्या और महादेव ऑनलाइन सट्टेबाजी ऐप सहित कुछ सबसे हाई-प्रोफाइल धन शोधन मामलों में प्रमुख जांचकर्ता थे।
सीमा शुल्क और अप्रत्यक्ष कर कैडर के 2004 बैच के भारतीय राजस्व सेवा (आईआरएस) के अधिकारी को ठीक एक साल पहले ईडी से वापस आने के बाद पश्चिम बंगाल के सिलीगुड़ी में आयुक्त (अपील) के रूप में तैनात किया गया था।
उन्होंने ईडी में करीब 12 वर्षों तक सेवा दी, जिससे वह एजेंसी में प्रतिनियुक्ति पर सबसे लंबे समय तक कार्य करने वाले अधिकारियों में शामिल हो गए।
अधिकारियों के अनुसार, 48 वर्षीय कुमार को अप्रैल में केंद्र सरकार ने स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति (वीआरएस) लेने की मंजूरी दे दी थी और इस संबंध में औपचारिक आदेश इसी महीने की शुरुआत में जारी किए गए।
अधिकारियों के अनुसार, सत्यब्रत कुमार की सेवानिवृत्ति वर्ष 2037 में निर्धारित थी। उनके पास 60 वर्ष की सेवानिवृत्ति आयु प्राप्त करने तक सरकारी सेवा में लगभग 11 वर्ष शेष थे।
सूत्रों ने ‘पीटीआई-भाषा’ को बताया कि कुमार ने व्यक्तिगत कारणों से सरकारी सेवा छोड़ने का फैसला किया।
कुमार ने ईडी के मुंबई स्थित पश्चिमी क्षेत्रीय कार्यालय द्वारा की गई कई चर्चित जांच का नेतृत्व किया। इनमें हीरा कारोबारी नीरव मोदी और मेहुल चोकसी के खिलाफ कथित दो अरब अमेरिकी डॉलर के बैंक धोखाधड़ी मामले, शराब कारोबारी विजय माल्या से जुड़े बैंक ऋण धोखाधड़ी मामले तथा महाराष्ट्र के कई नेताओं से जुड़े अनेक 'संवेदनशील' मामले शामिल थे।
पीएनबी धोखाधड़ी मामले में करोड़ों रुपये की विदेशी संपत्तियों को जब्त कराने में उनकी अहम भूमिका थी, जिन्हें अपराध से अर्जित आय माना गया था।
कुमार के नेतृत्व में ईडी के पश्चिमी क्षेत्रीय कार्यालय ने महादेव सट्टेबाजी ऐप मामले की भी जांच की, जिसमें छत्तीसगढ़ के कई नेताओं और कारोबारियों से संबंध सामने आए थे।
भाषा आशीष दिलीप
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