(शिरीष बी. प्रधान)
काठमांडू, 31 मई (भाषा) नेपाल के प्रधानमंत्री बालेंद्र शाह ने रविवार को कहा कि उन्हें उनके देश द्वारा भारत के कुछ क्षेत्रों पर “अतिक्रमण” करने के बारे में पता चला है। उन्होंने यह टिप्पणी लंबे समय से चले आ रहे सीमा विवाद पर संसद में सवालों के जवाब देने के दौरान की।
संसद के 11 मई को शुरू हुए मौजूदा सत्र में अपनी पहली उपस्थिति में, शाह ने आगे कहा कि भारत और नेपाल ने इतिहासकारों, सर्वेक्षकों और विशेषज्ञों की मदद लेकर समाधान खोजने पर सहमति जताई है और कहा कि काठमांडू ने इस मामले को चीन और ब्रिटेन के साथ भी उठाया है।
नेपाल और भारत के बीच लिपुलेख, लिम्पियाधुरा और कालापानी को लेकर पुराना सीमा विवाद है जिसमें दोनों देश अपना दावा करते हैं। भारत का कहना है कि ये क्षेत्र उत्तराखंड का हिस्सा हैं और इस मुद्दे को द्विपक्षीय बातचीत के माध्यम से हल किया जाना चाहिए।
नयी दिल्ली ने रविवार को नेपाल के प्रधानमंत्री की टिप्पणियों पर तत्काल कोई प्रतिक्रिया नहीं दी। लेकिन इस महीने की शुरुआत में, भारत ने लिपुलेख दर्रे से होकर गुजरने वाली आगामी कैलाश मानसरोवर यात्रा पर नेपाल की आपत्ति को खारिज करते हुए, इस क्षेत्र पर काठमांडू के क्षेत्रीय दावों को “एकतरफा कृत्रिम विस्तार” करार दिया था, जिसे नयी दिल्ली “अस्वीकार्य” मानती है।
शाह ने संसद को बताया, “नेपाल सरकार ने भारत को आधिकारिक तौर पर एक राजनयिक नोट भेजा है, जिसमें भारत द्वारा लिपुलेख सहित विभिन्न क्षेत्रों पर अतिक्रमण के मुद्दे का उल्लेख किया गया है, और हमें उनका जवाब पहले ही मिल चुका है। दोनों देशों ने इतिहासकारों, सर्वेक्षकों और संबंधित विशेषज्ञों की मदद से राजनयिक माध्यमों से एक साथ बैठकर इस मुद्दे को हल करने पर सहमति जताई है।”
जब एक सांसद ने विशेष रूप से लिम्पियाधुरा, लिपुलेख और कालापानी क्षेत्रों से संबंधित विवाद पर सरकार के दृष्टिकोण के बारे में पूछा, तो शाह ने कहा कि केवल भारत ने ही “अतिक्रमण” नहीं किया, बल्कि नेपाल ने भी भारत के साथ ऐसा ही किया है।
शाह ने कहा, “आपको एक तथ्य जानकर आश्चर्य होगा, जो मुझे प्रधानमंत्री बनने के बाद ही पता चला है। भारत ने न केवल नेपाली क्षेत्रों पर अतिक्रमण किया है, बल्कि नेपाल ने भी कई स्थानों पर भारत के क्षेत्रों पर अतिक्रमण किया है। अब दोनों देशों को तथ्यों का अध्ययन करना चाहिए और मित्रवत एक साथ बैठकर इस मुद्दे का हल करना चाहिए।”
नेपाली प्रधानमंत्री ने कहा कि काठमांडू ने इस मुद्दे पर चीन और ब्रिटेन के साथ राजनयिक चर्चा भी की- ये तीनों स्थान भारत, तिब्बत और नेपाल के त्रिकोणीय बिंदु के पास स्थित हैं। प्रधानमंत्री ने कहा कि उन्होंने ब्रिटेन के साथ यह मामला इसलिए उठाया, क्योंकि यह उस दौर से जुड़ा है जब ब्रिटिश सरकार ने इस क्षेत्र को छोड़ दिया था।
नेपाल द्वारा भारतीय क्षेत्रों पर अतिक्रमण करने के संबंध में शाह की टिप्पणियों से विवाद खड़ा हो गया है।
नेपाली कांग्रेस के बसाना थापा और नेपाली कम्युनिस्ट पार्टी के रमेश मल्ला सहित विपक्षी सांसदों ने शाह की टिप्पणियों पर आपत्ति जताई और मांग की कि उन्हें संसदीय रिकॉर्ड से हटा दिया जाए।
उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री को या तो अपने इस दावे के समर्थन में सबूत पेश करने चाहिए कि नेपाल ने भारतीय क्षेत्र पर अतिक्रमण किया है या फिर अपना बयान वापस लेना चाहिए।
खबरों के मुताबिक, नेपाल के पूर्व विदेश मंत्री प्रदीप ज्ञवाली ने भी शाह से माफी मांगने की मांग की है।
नेपाल के कई सोशल मीडिया उपयोगकर्ता इसकी आलोचना कर रहे हैं, जबकि विशेषज्ञों ने इसे खारिज कर दिया है।
भारत में नेपाल के पूर्व राजदूत नीलंबरा आचार्य ने कांतिपुरऑनलाइन मीडिया पोर्टल को बताया कि शाह के पास “नेपाल द्वारा भारतीय क्षेत्रों पर अतिक्रमण किए जाने के संबंध में कोई जानकारी नहीं है।”
आचार्य के अनुसार, दोनों पक्षों के बीच 97 प्रतिशत सीमा विवाद पहले ही सुलझ चुके हैं, लेकिन कुछ ऐसे भी हैं जो अब भी लंबित हैं।
उन्होंने कहा कि कुछ सीमावर्ती क्षेत्रों में सीमा स्तंभों के न होने के कारण कुछ नेपाली लोगों द्वारा भारत में और कुछ भारतीयों द्वारा नेपाल में भूमि का उपयोग करने की खबरें हैं, लेकिन नेपाल सरकार ने स्वयं भारत के क्षेत्र पर अतिक्रमण नहीं किया है।
भारत में नेपाल के एक अन्य पूर्व राजदूत दीप कुमार उपाध्याय ने कहा कि नेपाल द्वारा भारत की धरती पर अतिक्रमण का कोई रिकॉर्ड नहीं है।
उन्होंने नेपालप्रेस ऑनलाइन समाचार पोर्टल को बताया, “भारत ने भी इस मुद्दे को सार्वजनिक रूप से नहीं उठाया है...… हमने अब तक अध्ययन किए हैं, लेकिन यह मुद्दा कभी सामने नहीं आया…... मुझे नहीं पता कि प्रधानमंत्री ने किस संदर्भ में इतने गंभीर मामले पर बात की।”
नेपाल-भारत सीमा विशेषज्ञ और प्रख्यात भूगोलवेत्ता बुद्धि नारायण श्रेष्ठ ने भी नेपाल द्वारा भारतीय क्षेत्रों पर अतिक्रमण करने के संबंध में प्रधानमंत्री के बयान को खारिज कर दिया है।
उन्होंने कहा कि नेपाल ने कभी भारतीय क्षेत्रों पर अतिक्रमण नहीं किया है और न ही सीमावर्ती क्षेत्रों में अपना कब्जा बढ़ाया है। उन्होंने यह भी कहा कि कुछ सीमावर्ती क्षेत्रों में सीमा पार खेतों के कारण दोनों देशों के किसान एक-दूसरे की जमीन का इस्तेमाल करते रहे हैं।
इस महीने की शुरुआत में, नेपाल के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता लोक बहादुर छेत्री ने कहा था कि देश राजनयिक चैनलों के माध्यम से भारत के साथ सीमा मुद्दे को हल करने के लिए प्रतिबद्ध है।
भाषा
प्रशांत नरेश
नरेश