बाबा बकाला साहिब, 31 मई (भाषा) अकाल तख्त के जत्थेदार ज्ञानी कुलदीप सिंह गड़गज ने रविवार को कहा कि पंथ के भविष्य को खतरे में डालने वाले बेअदबी रोधी कानून को सिख समुदाय स्वीकार नहीं कर सकता।
उन्होंने कहा हालांकि खालसा पंथ बेअदबी के दोषियों के लिए कड़ी सजा का समर्थन करता है लेकिन सिख धार्मिक संहिता (मर्यादा) और सेवादारों से संबंधित प्रावधानों पर गंभीर आपत्तियां हैं।
जत्थेदार ‘जागत जोत श्री गुरु ग्रंथ साहिब सत्कार (संशोधन) अधिनियम, 2026’ के प्रावधानों पर चर्चा के लिए आयोजित पंथिक सम्मेलन में उपस्थित लोगों को संबोधित कर रहे थे।
वक्ताओं ने सर्वसम्मति से अधिनियम में मौजूद सभी खामियों और आपत्तिजनक प्रावधानों को दूर करने की आवश्यकता पर बल दिया।
उन्होंने सरकार से अधिक लचीला रुख अपनाने और सिख भावनाओं के अनुरूप अधिनियम में संशोधन करने का आग्रह किया।
पंजाब विधानसभा ने 13 अप्रैल को सर्वसम्मति से ‘जागत जोत श्री गुरु ग्रंथ साहिब सत्कार (संशोधन) अधिनियम, 2026’ पारित कर दिया था।
इसमें गुरु ग्रंथ साहिब के अपमान के किसी भी कृत्य के लिए आजीवन कारावास सहित कठोर दंड का प्रावधान है।
गड़गज ने कहा कि पंजाब विधानसभा ने इस कानून के माध्यम से गुरु ग्रंथ साहिब और गुरु पंथ दोनों पर नियंत्रण स्थापित करने का प्रयास किया है।
उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि पंजाब विधानसभा न तो गुरु खालसा पंथ का प्रतिनिधित्व करती है और न ही उसे धार्मिक सिद्धांतों व प्रथाओं को निर्धारित करने का अधिकार है।
जत्थेदार ने तर्क दिया कि ऐसे कार्य पंथ के अधिकारों में हस्तक्षेप के समान हैं।
उन्होंने कहा, “सरकारें आती-जाती रहती हैं लेकिन अकाल तख्त शाश्वत है और कोई भी सरकार सिखों की सहमति के बिना उन पर नियम नहीं थोप सकती।” गड़गज ने कहा कि असली मुद्दा तो बेअदबी के कृत्यों के लिए जिम्मेदार लोगों को गिरफ्तार करना और उन्हें कड़ी से कड़ी सजा देना है।
गड़गज ने सिखों से उन ताकतों के प्रति सजग रहने का आह्वान किया, जो वर्षों से लगातार गुरु ग्रंथ साहिब की पवित्रता पर हमला कर रही हैं और 1978, 1984, 2001 और 2015 में हुई बेअदबी की पिछली घटनाओं का हवाला दिया।
भाषा जितेंद्र नरेश
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