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साकेत इमारत हादसा: मलबे के नीचे दबी किताबें और सपने, महीनों की तैयारी मिट्टी में मिली

(मानसी जगानी)

नयी दिल्ली, 31 मई (भाषा) दक्षिण दिल्ली के साकेत इलाके में एक बहुमंजिला इमारत के ढहने के साथ ही विदेश में मेडिकल व इंजीनियरिंग में दाखिले की तैयारी कर रहे कुछ अभ्यर्थियों का सपना और महीनों की तैयारी मलबे के नीचे दबकर रह गयी।

इस हादसे में छह लोगों की मौत हो गई।

इस इमारत में कई कोचिंग संस्थान थे, जिनमें मेडिकल और इंजीनियरिंग की परीक्षाओं की तैयारी कराई जाती थी।

इस दुखद घटना के अगले दिन यानी रविवार को कई अभ्यर्थियों ने दहशत, धूल के गुबार और तबाही के मंजर का वर्णन किया।

साकेत मेट्रो स्टेशन के पास स्थित सैद-उल-अजैब इलाके में पुस्तकालय, कोचिंग संस्थान, छात्रावास और भोजनालय हैं, जो सैकड़ों विद्यार्थियों की जरूरतों को पूरा करते हैं।

यहां पढ़ाई करने वाले बच्चों में विदेशी मेडिकल स्नातक (एफएमजी) के अभ्यर्थी, राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा (नीट), गेट और अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे अभ्यर्थी शामिल हैं।

हालांकि, इस इलाके के कई लोगों के लिए इस हादसे ने इस मोहल्ले का स्वरूप ही बदल दिया।

विद्यार्थियों व स्थानीय लोगों का कहना है कि यह इलाका पूरे भारत से और यहां तक ​​कि विदेशी नागरिकों को भी आकर्षित करता है, जो पढ़ाई या कोचिंग संस्थानों में तैयारी के लिए दाखिला लेने आते हैं।

इमारत के ढहने वाली जगह से मिली तस्वीरों में एक संकरी गली में एक बहुमंजिला व्यावसायिक-आवासीय इमारत का मलबा दिखाई दे रहा है और आसपास के लोग इलाके में जमा हो गए हैं।

झारखंड के बोकारो से एमबीए करने वाले अनिल ने इस हादसे में अपने दोस्त राजी को खो दिया।

पिछले एक साल से दिल्ली में रह रहे अनिल घटना के समय पास की ही एक इमारत के पुस्तकालय में पढ़ाई कर रहे थे।

उन्होंने बताया, “पुस्तकालय में कई छात्र थे। हमें हल्के झटके महसूस हुए लेकिन कोई तेज आवाज नहीं आई। कुछ ही पलों में इमारत ढह गई।”

प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे कई छात्र सदमे में हैं, कुछ ने अपने दोस्त खो दिए जबकि बहुत से लोग घायल हो गए।

अनिल ने कहा, “हम पहले से ही परीक्षाओं के तनाव में थे। अब कोई भी ध्यान केंद्रित नहीं कर पा रहा है। 28 जून को एक महत्वपूर्ण परीक्षा है और इस घटना से कई छात्र मानसिक रूप से प्रभावित हुए हैं।”

कई विद्यार्थियों ने बताया कि ढही हुई इमारत के बगल में पुस्तकालय में उस समय लगभग 150 छात्र मौजूद थे।

एक छात्र ने बताया, “हमें बहुत तेज कंपन महसूस हुआ। ऐसा लग रहा था जैसे जमीन हिल रही है। हर कोई घबरा गया और बाहर की ओर भागा।”

एक अन्य छात्र ने बाद के हालात को ‘प्रलय के बाद का दृश्य’ बताया। उसने कहा, “हर तरफ धूल ही धूल थी। लोग अपने फोन, किताबें, लैपटॉप और टैबलेट वहीं छोड़कर भाग गए। बाद में, कुछ छात्र अपना सामान लेने वापस गए। जब ​​वे लौटे, तो उन्होंने बताया कि सब कुछ धूल और मलबे के नीचे दबा हुआ था।”

विद्यार्थियों ने बताया कि वे पुस्तकालय की दीर्घकालिक सदस्यता के लिए हजारों रुपये का भुगतान करते हैं और अपना अधिकांश समय वहां परीक्षा की तैयारी में बिताते हैं।

कुछ निवासियों ने यह भी आरोप लगाया कि इलाके की कई इमारतों में तय सीमा से अधिक मंजिलें हैं और उन्होंने मोहल्ले का व्यापक ढांचागत निरीक्षण कराने की मांग की।

एक निवासी ने कहा, “कोचिंग संस्थान, पुस्तकालय, दफ्तर, सैलून, शिक्षण संस्थान की अधिकता के कारण इलाके में दिन भर भीड़भाड़ रहती है। ”

इलाके में किराए पर रहने वाले जनकपुरी के एक छात्र ने कहा कि इस हादसे के कारण कई विद्यार्थियों को अपनी पढ़ाई पर ध्यान केंद्रित करने में कठिनाई हो रही है।

उन्होंने कहा, “हम महीनों से तैयारी कर रहे थे। हममें से कई लोग अलग-अलग राज्यों से सिर्फ पढ़ाई करने के लिए यहां आए थे। लेकिन अब हमें किसी तरह पढ़ाई जारी रखनी ही होगी क्योंकि कोई और विकल्प नहीं है।”

कई विद्यार्थियों ने शुरुआती कार्रवाई की गति पर भी सवाल उठाया और दावा किया कि बचाव दल इमारत गिरने के लगभग दो घंटे बाद पहुंचे।

भाषा जितेंद्र नरेश

नरेश