चंडीगढ़, 31 मई (भाषा) पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान ने रविवार को कहा कि राज्य में शिक्षा के क्षेत्र में आई क्रांति ने सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले छात्रों की आकांक्षाओं में बदलाव लाकर उनके लिए अवसरों के नए द्वार खोल दिए हैं।
यहां आयोजित ‘सितारे जमीन ते’ कार्यक्रम में मान ने जोर देकर कहा कि सरकारी स्कूल अब पहचान के लिए संघर्ष नहीं कर रहे हैं, बल्कि पूरे देश में उत्कृष्टता, आत्मविश्वास और अवसर के लिए नए मानदंड स्थापित कर रहे हैं। इस कार्यक्रम में कक्षा 8, 10 और 12 के शीर्ष प्रदर्शन करने वाले छात्रों को सम्मानित किया गया।
वह पंजाब के विभिन्न जिलों के मेधावी छात्रों के सम्मान समारोह को संबोधित कर रहे थे।
छात्रों की उत्कृष्ट उपलब्धियों पर उन्हें बधाई देते हुए मान ने कहा, “इस तरह के समारोह पहले कभी आयोजित नहीं किए गए क्योंकि पिछली सरकारों ने शिक्षा पर, विशेष रूप से सरकारी स्कूलों में, कभी ध्यान नहीं दिया।”
उन्होंने कहा, “पहले इन स्कूलों में पढ़ने वाले छात्र अक्सर परीक्षाओं में भाग लेने को लेकर झिझकते और अनिश्चित रहते थे, लेकिन आज वे आत्मविश्वास के साथ उत्कृष्ट प्रदर्शन कर रहे हैं और अपनी क्षमताओं को साबित कर रहे हैं।”
शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार के लिए अपनी सरकार द्वारा किए जा रहे प्रयासों पर प्रकाश डालते हुए, मान ने कहा, “हमारे शिक्षकों को विशेष प्रशिक्षण के लिए विदेश भेजा जा रहा है जहां वे आधुनिक शिक्षण पद्धतियां सीखते हैं। वापस आने के बाद, वे इस ज्ञान को छात्रों और साथी शिक्षकों के साथ साझा करते हैं ताकि शिक्षा के वैश्विक मानक पंजाब भर की कक्षाओं तक पहुंचें।”
उन्होंने कहा, “यह पहल शिक्षकों की विशेषज्ञता को बढ़ाती है और उन्हें आधुनिक पद्धतियों से लैस करती है ताकि छात्रों को भविष्य की चुनौतियों और अंतरराष्ट्रीय प्रतिस्पर्धा के लिए तैयार किया जा सके।”
छात्रों से जमीन से जुड़े रहने और मेहनती बने रहने का आह्वान करते हुए मान ने कहा, “आपको जीवन में जमीनी स्तर पर काम करने वाले बनने का प्रयास करना चाहिए, न कि रातोंरात सफलता पाने वाले। जमीनी स्तर पर काम करने वाले लोग कड़ी मेहनत और दृढ़ संकल्प के बल पर जमीन से उठते हैं और दुनिया को जीत लेते हैं।”
इस मौके पर आम आदमी पार्टी के नेता मनीष सिसोदिया ने देश की परीक्षा प्रणाली में व्यापक सुधारों की आवश्यकता पर जोर दिया।
उन्होंने कहा, “देश की पुरानी परीक्षा प्रणाली को बदलना होगा। नीट और अन्य परीक्षाओं में पेपर लीक होने से अनगिनत छात्रों का भविष्य बर्बाद हो रहा है। 19वीं सदी की इस प्रणाली पर निर्भर रहने के बजाय, परीक्षाओं को छात्रों की समग्र योग्यता और क्षमताओं का मूल्यांकन करना चाहिए, न कि केवल तीन घंटे की परीक्षा तक सीमित रखना चाहिए।”
सिसोदिया ने कहा, “परीक्षा प्रणाली को 21वीं सदी के छात्रों की जरूरतों और क्षमताओं के अनुरूप होना चाहिए ताकि उनके समग्र व्यक्तित्व और क्षमता का विकास हो सके। इस परिवर्तन के लिए ऐसी सरकारों का चुनाव होना जरूरी है जो शिक्षा को प्राथमिकता दें और उसमें निवेश करें।”
भाषा प्रशांत वैभव
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